नई दिल्ली। चुनाव का अंतिम चरण अभी बाकी है। लेकिन सियासत की शतरंजी बिसात पर गोटियां बिछने लगी हैं। यूपीए और एनडीए दोनों अपना-अपना खेमा मजबूत करने में लगे हैं। चुनाव बाद जो गोटियां मजबूत दिख रही हैं उन्हें अपने खेमे में लाने की कवायद तेज हो गई है। हर पार्टी ने अपने-अपने खिलाड़ी मैदान में उतार दिए हैं जो गठबंधन में नए सहयोगियों को जोड़ने में लगे हैं।
बीजेपी के वजीर जसवंत सिंह को जिम्मेदारी दी गई है दो अहम गोटियां सेट करने की एक हैं जयललिता तो दूसरी ममता। दार्जिलिंग से चुनाव लड़ रहे जसंवत ममता के करीब हैं और जयललिता से उनकी करीबी मानी जाती है। इनके अलावा दक्षिण में बीजेपी की नजर चंद्रबाबू नायडू, फिल्मी सितारे से नेता बने चिरंजीवी और चंद्रशेखर राव तीनों पर है।
इन तीनों को एक साथ साधने की जिम्मेदारी कर्नाटक के अनंत कुमार और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष वेंकैया नायडू को दी गई है। वेंकैया खुद भी आंध्र प्रदेश के ही हैं। साउथ के इन दोनों नेताओं के लिए ये समीकरण साधना आसान होगा। हाल ही में एनडीए से छिटके नवीन पटनायक से भी उम्मीदें खत्म नहीं हैं। उन्हें साधने के लिए बीजेपी ने लगाया है जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव और प्रकाश सिंह बादल को।
बीजेपी की तुलना में कांग्रेस को ज्यादा जोड़-तोड़ करनी पड़ रही है। मसलन पार्टी जयललिता को अपने खेमे में लाने की फिराक में है और उन्हें लुभाने के लिए लगाया गया है गुलाम नबी आजाद को जो तमिलनाडु के पार्टी प्रभारी भी हैं। नजर अजित सिंह पर भी है और जरूरत पड़ी तो सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल उन्हें पटाएंगे। अजित सिंह और अहमद पटेल की अच्छी छनती है।
आंध्र में कांग्रेस की नजर चिरंजीवी और तेलंगाना राष्ट्र समिति के चंद्रशेखर राव पर है। जरूरत पड़ी तो उन्हें मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी पटाएंगे। लेफ्ट के प्रकाश करात और ए बी वर्धन को पटाने के लिए खुद प्रणव मुखर्जी लगे हैं। उनकी कोशिश है ममता और लेफ्ट के बीच बैलेंस बनाने की। नजर नीतीश कुमार पर भी है और जरूरत हुई तो उनसे बातचीत करने के लिए सुशील कुमार शिंदे आगे आएंगे।
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