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बढ़ी स्कूल फीस से हों परेशान तो हमें बताएं

Posted on May 11, 2009 at 14:07 | Updated Jul 03, 2009 at 11:58

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के दो हज़ार से ज्यादा निजी स्कूलों में पढ़ने वाले तीस लाख से ज्यादा बच्चों के अभिभावक इन दिनों बेहद गुस्से में हैं। वजह है निजी स्कूलों द्बारा बढ़ाई गई बेतहाशा फीस। छठे वेतन आयोग की आड़ में अधिकांश स्कूलों ने अपनी फीस 30 से 40 फीसदी बढ़ा दी है और अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है एरियर सहित फीस भरने के लिए। क्या आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। क्या आपके बच्चे पर भी स्कूल दबाव बना रहा है बढ़ी हुई फीस भरने के लिए, या फिर आपने फैसला किया है इस मनमानी का विरोध करने का। सिटीज़न जर्नलिस्ट लगातार इस मुहिम में आपके साथ है। आप हमें लिखिए इस मुद्दे पर अपनी राय, अपनी कोशिशें, स्कूलों की मनमानी और सिटीज़न जर्नलिस्ट के जरिए हम प्रशासन और मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे आपकी बात। हमें लिखें editor@ibnkhabar.com पर।

कई अभिभावकों ने हमारी वेबसाइट ibnkhabar.com पर अपनी राय लिखी-

सिटीज़न जर्नलिस्ट पर ये रिपोर्ट दिखाए जाने के बाद कई अभिभावकों ने हमारी वेबसाइट ibnkhabar.com पर अपनी राय लिखी दिल्ली से अशोक कुमार का कहना है कि "फीस बढ़ाने का फैसला मजबूरी नहीं बल्कि स्कूलों का बढ़ता लालच है। फीस बढ़ोत्तरी को सही ठहराने के लिए स्कूल अपने बहीखातों में फेरबदल तक कर रहे हैं इस पर रोक लगनी चाहिए।"

एक और अभिभावक अनादीश पॉल का कहना है "बढ़ती फीस से परेशान माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बच्चों के भविष्य के लिए या तो फीस बढ़ोत्तरी रोकी जाए या सरकारी स्कूलों को पढ़ने लायक बनाया जाए।"

वहीं, फरीदाबाद के दीपक खरबंदा का कहना है कि बढ़ी हुई फीस देना मध्यमवर्ग के लिए आफ़त बनता जा रहा है। शिक्षा मंत्री को इस बारे मे जल्द से जल्द कुछ करना होगा नहीं तो अभिभावकों के प्रदर्शन बढ़ते जाएंगे।

सिटीज़न जर्नलिस्ट की मार्फत ibnkhabar.com पर लिखे गए सभी सवालों और सुझावों को हम संबंधित मुख्मंत्रियों और शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाएंगे और आपको लगातार दिखाते रहेंगे कि इस मामले में क्या कार्रवाई हो रही है।

सिटीजन जर्नलिस्ट की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें।


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