चेन्नई। केंद्र में अगली सरकार का रास्ता तमिलनाडु से होकर जाएगा। ऐसे में जयललिता अचानक सबकी निगाह में बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं। पिछली बार कांग्रेस और डीएमके गठबंधन ने तमिलनाडु और पांडिचेरी की सभी सीटों पर परचम फहराया था, लेकिन इस बार हवा का रुख जयललिता के हक में माना जा रहा है।
तमिलनाडु की सियासी तस्वीर पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। 13 मई को यहां मतदान है। माना जा रहा है कि यहां जो तस्वीर उभरेगी, उससे तय होगा कि दिल्ली में किसको बढ़त मिलेगी। पिछली बार
एआईएडीएमके सुप्रीमो एक सीट पाने को तरस गईं थीं लेकिन इस बार वे आत्मविश्वास से भरी हैं। उनका दावा है कि इस बार नतीजे पिछली बार से उलट होंगे।
हालांकि इतिहास बताता है कि ज्यादातर जीत उस खेमे को मिली है जिसमें कांग्रेस शामिल रही है। पर इस बार जाति-क्षेत्र के तमाम समीकरण बदले नजर आ रहे हैं। उधर, सुपरस्टार विजयकांत की डीएमडीके भी आंकड़ों पर असर डाल सकती है जो अकेले चुनाव लड़ रही है।
कांग्रेस भी तमिलनाडु की उथल-पुथल पर नजर गड़ाए हुए है। जयललिता की जीत की संभावना को देखते हुए राहुल गांधी ने जयललिता की तारीफ करके भविष्य की ओर इशारा कर दिया है। लेकिन अभी गठबंधन की मजबूरी है। इसलिए करुणानिधि से गठबंधन तोड़ने की बात से इंकार किया जा रहा है।
अब ये दावा कितना दमदार है, इसका पता तो 16 मई को नतीजे आने के बाद चलेगा। लेकिन इसमें शक नहीं कि इस बार जयललिता अपने विरोधियों से कई कदम आगे दिख रही हैं।
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