नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में मनमोहन सिंह को एक बार फिर नेता चुन लिया गया है। अब उनको यूपीए का नेता चुने जाने की औपचारिकता भर बाकी है। खबर है कि 22 मई को मनमोहन पीएम पद की शपथ ले सकते हैं। सत्ता के गलियारे में अब चर्चा है तो सिर्फ नई कैबिनेट की किसे कौन सा पोर्टफोलियो मिलेगा इस पर जम कर कयासबाजी हो रही है।
मोंटेक या प्रणब दा
अगर मोंटेक कैबिनेट में शामिल हुए तो मुखर्जी विदेश मंत्री बने रहेंगे। यदि युवा और योग्यता की बात सामने आई तो विदेश मंत्री के लिए शशि थरूर का भी नाम आगे आ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम है। मालूम हो कि शशि थरूर पिछली बार यूएन जेनरल सेक्रेटरी पद के लिए भी चुनाव लड़ चुके हैं।
ये रह सकते हैं कायम
जबकि गृहमंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए के एंटनी और वाणिज्य-उद्दोग मंत्री कमलनाथ के मंत्रालयों में फेरबदल की उम्मीद कम है।
युवा ब्रिगेड से कौन?
यह भी कहा जा रहा है कि राहुल गांधी की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए इस बार मंत्रिमंडल में युवाओं के तरजीह दी जा सकती है। जिन युवा सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की चर्चा है उनमें मिलिंद देवड़ा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद प्रमुख हैं। जबकि राहुल गांधी यदि कैबिनेट में शामिल हुए तो उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा जा सकता है।
मिल सकती है सलमान, सलीम को कैबिनेट सीट
कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे और तमिलनाडु से मनिका टैगोर को भी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा मंत्रियों जैसे कपिल सिब्बल, अंबिका सोनी, मीरा कुमार के साथ नए मंत्रियों में उत्तर प्रदेश से जीतकर आए सलमान खुर्शीद, सलीम शेरवानी और बेनी प्रसाद भी कैबिनेट में जगह पा सकते हैं। जबकि लोकसभा पद को कांग्रेस अपने पास रखेगी। इसके लिए सुशील शिंदे, जयपाल रेड्डी, किशओर देव के नाम की चर्चा है।
लालू, पासवान का पत्ता कटा
दूसरी तरफ, पिछली सरकार में रहे रेलमंत्री लालू प्रसाद की मंत्रिमंडल में वापसी को लेकर असमंजस की स्थिति है। यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने आगामी 20 मई को अपने सहयोगियों की बैठक बुलाई है, लेकिन इस बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान को नहीं बुलाया गया है।
जबकि राजद, सपा और तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को यूपीए की नई सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का प्रस्ताव देते हुए कहा कि नए मंत्रिमंडल में शामिल होने में उनकी रुचि नहीं है।
क्या प्रफुल्ल पटेल लौटेंगे?
जबकि घटक दलों में एनसीपी के शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल नई सरकार में शामिल हो सकते हैं।
अझगिरी या मारन
डीएमके की ओर से एम के अझगिरी औऱ दयानिधि मारन के नाम पर भी विचार जारी है।ए राजा और कनिमोझी को भी मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है।
फारूख के भी हैं चांस
इसके अलावा घटक दल नेशनल कांफ्रेंस के नेता एवं सांसद फारूख अब्दुल्ला को भी मंत्री बनाया जा सकता है।
टीएमसी से कौन?
तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया।
अजित या कोई और
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह ने भी समर्थन की घोषणा कर दी है। लेकिन, कांग्रेस ने अजीत सिंह के सामने कैबिनेट में शामिल करने के बदले एक शर्त रख दी है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने सोमवार को फैसला किया कि अगर अजित को कैबिनेट में शामिल करना है तो उन्हें अपनी पार्टी का विलय करना होगा। गौरतलब है कि अजीत सिहं ने एनडीए के साथ चुनाव लड़ा था।
नवीन क्या करेंगे?
तीसरे मोर्चे के अंग रहे उड़ीसा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद केंद्र में नई सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बार राष्ट्रीय मंच पर वह एक ताकतवर नेता के रूप में उभर सकते हैं। वैसे देखा जाए तो उड़ीसा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और वामपंथी पार्टियों के साथ बीजद द्वारा किए गए सीटों के तालमेल का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि दोनों की उड़ीसा में कोई खास उपस्थिति नहीं है।
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