नई दिल्ली। मनमोहन सिंह सरकार का भाग्य तय करने के लिए लोकसभा का दो दिन का विशेष सत्र आज सुबह शुरू हो गया।
सदन की कार्यवाही नए सांसदों को शपथ दिलाने के साथ शुरू हुई। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि मैं सदन को भरा हुआ देखकर काफी खुश हूं।
प्रधानमंत्री, जो लोकसभा के सदस्य नहीं हैं, ने सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया।
सदन में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानि यूपीए सरकार को विश्वास मत जीतने के लिए 271 सांसदों के समर्थन की जरूरत हैं।
बहस के बाद मंगलवार को लोक सभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी और चर्चा का जबाव एक बार फिर प्रधानमंत्री देंगे और उसके बाद मत विभाजन होगा जिसमें सरकार के भाग्य का फ़ैसला होगा।
बहस के लिए 16 घंटे का समय तय किया गया है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बहस इससे अधिक भी चल सकती है।
हालांकि सदन में जाने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सदन में बहुमत साबित करने का दावा किया। मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हे पर्याप्त सांसदों का समर्थन हासिल है।
नंबरों के इस खेल में यूपीए अभी थोड़ा पिछड़ रही है। आईबीएन7 की गिनती के मुताबिक फिलहाल सरकार के पास 271 के जादुई आंकड़े के मुकाबले 268 सांसद हैं। यूपीए की आस उन पांच सांसदों पर भी टिकी है जो कि देर रात एनडीए की डिनर डिप्लोमैसी में शरीक नहीं हुए।
जबकि राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह और जनता दल-एस नेता एच डी देवगौड़ा को अपने पाले में खड़ा कर बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती ने अपनी चुनौती को बरक़रार रखा।
मायावती के सुर में सुर मिलाते हुए सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने भी ऐलान किया है कि 22 जुलाई को विश्वास मत से इस सरकार और परमाणु क़रार दोनों का खेल समाप्त हो जाएगा।
इससे पहले रविवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अपने वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के मंत्री सुभाष चक्रबर्ती की सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मतदान के फैसले की निंदा की।
इस बीच पार्टी की केंद्रीय समिति ने शनिवार और रविवार को हुई अपनी बैठक में पोलित ब्यूरो को अधिकृत किया कि वह पार्टी सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के इस्तीफे के मुद्दे से निपटे।
गौरतलब है कि चटर्जी द्वारा कथित रूप से अपने पद से त्यागपत्र देने से इंकार कर देने के बाद पार्टी को सार्वजनिक रूप से शर्मिदगी का सामना करना पड़ा था।
वाम दलों द्वारा मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद माकपा ने चटर्जी को सलाह दी थी कि वे अपने पद से त्यागपत्र दे दें। इस पर चटर्जी ने कहा था कि लोकसभा अध्यक्ष का पद पार्टीगत राजनीति से ऊपर है।
विश्वास प्रत्साव पर वोटिंग मंगलवार यानि 22 जुलाई को शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच होगी।
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