नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सरकार बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। डीएमके का मामला चल ही रहा था कि नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला मुंह फुलाकर दक्षिण अफ्रीका चल दिए। अब्दुल्ला को शिकायत थी कि उनको कैबिनेट मंत्री बनाने का न्योता नहीं मिला। हालांकि उनकी दबाव की रणनीति काम आई और अब दूसरी सूची में उन्हें सरकार में शामिल होने का न्योता मिल गया है।
अब्दुल्ला का कहना था कि मेरा एक महीना पहले से रिजर्वेशन था। मैं साउथ अफ्रीका आईपीएल का फाइनल देखने जा रहा हूं। मैच तो रुक नहीं सकता। मुझे ब्रेक चाहिए इसलिए जा रहा हूं।
जब उनसे ये कहा गया कि शपथ ग्रहण समारोह में उनके न होने से गलत संदेश नहीं जाएगा क्या तो उनका जवाब था कि एक फारुक अब्दुल्ला के न होने से शपथ ग्रहण समारोह पर भला क्या असर पड़ेगा।
दरअसल, फारुक को उम्मीद थी कि उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना तय है। सीनियरिटी और कांग्रेस से अच्छे रिश्ते को देखते हुए उनकी उम्मीद जायज थी। प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत भी हुई लेकिन मंत्री बनाने का न्योता नहीं मिला। लिहाजा डॉक्टर अब्दुल्ला ने अफ्रीका का रुख अख्तियार किया।
यूं तो अब्दुल्ला और उनके पुत्र उमर ने यही दिखाने की कोशिश की कि वो कांग्रेस की मजबूरी समझते हैं लेकिन अपनी नाराजगी जाहिर करने का कोई मौका छोड़ा भी नहीं। फारुक अब्दुल्ला का साउथ अफ्रीका जाना इसी प्रेशर टैक्टिस का नतीजा था। आखिरकार उन्हें दूसरे कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनाने का आश्वासन मिल गया।
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