नई दिल्ली। मनमोहन सिंह मुश्किल में हैं। पहले मंत्रिमंडल में जगह दो फिर अच्छा पोर्टफोलियो भी चाहिए। सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह पिछले चार दिनों से इसी समस्या से दो चार हो रहे हैं। छह मंत्रियों को तो विभाग मिल चुका है लेकिन बाकी मलाईदार मंत्रालय के लिये मार मचा रहे हैं।
कमलनाथ- वाणिज्य मंत्री रह चुके हैं। चाहते हैं कि प्रामोशन नहीं दिया तो डिमोट तो मत करो। नजरें दोबारा वाणिज्य विभाग पर टिकी हैं।
कपिल सिब्बल- कानून मंत्रालय देने की बात हो रही है मगर वो वाणिज्य मंत्रालय चाहते हैं। कोशिश ये है कि कुछ नहीं तो एचआरडी पर ही बात बन जाए।
गुलाम नबी आजाद- विदेश मंत्रालय पर नजर थी लेकिन संसदीय कार्य मंत्रालय देने की चर्चा है। पुराने वफादार हैं, इसलिए दमदार मंत्रालय के दावेदार हैं। जहां भेजे गए खुद को साबित किया। संसदीय कार्य मंत्रालय को अपने कद के मुताबिक नहीं मानते।
फारूक अब्दुल्ला- नेशनल कान्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला किसी छोटे मंत्रालय में कैसे जाएंगे। अपने सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस को समर्थन भी दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि हेल्थ विभाग दिया जा सकता है।
अंबिका सोनी- हेल्थ मंत्रालय अंबिका सोनी भी चाहती हैं। अंबिका के पास पहले टूरिज्म विभाग था। अंबिका को हेल्थ मिला तो फारूक अब्दुल्ला को टूरिज्म दिया जा सकता है।
करुणानिधि खेमे को आईटी मंत्रालय मिलना तो तय है। बेटे अझागिरी के लिए एक मलाईदार विभाग और चाहते हैं। कांग्रेस के जूनियर मंत्रियों के दावे भी दमदार हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया अगर कैबिनेट मंत्री नहीं बन सकते तो विभाग तो अच्छा मिल ही सकता है। सचिन पायलट पहली बार मंत्री बनेंगे लेकिन राजस्थान में झंडा बुलंद किया है इसलिये उम्मीद ज्यादा है। जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण चेहरे हैं इसलिये गृह मंत्रालय में जाना चाहते हैं। कुल मिलाकर मंत्रालय कम और नेताओं की विश लिस्ट लंबी है। मनमोहन के लिये ये काम बजट को अंतिम रूप देने से कम मुश्किल नहीं।
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