नई दिल्ली। मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में भी परिवारवाद का बोलबाला रहा। युवाओं के, प्रतिभाओं के दावे दरकिनार कर दिए गए और दिग्गजों की विरासत औलादों के हाथ थमा दी गई। राहुल गांधी के टैलेंट हंट के नाम पर हुई तमाम माथापच्ची के बाद हाईकमान की नजर आमतौर पर वहीं टिकी जिनके पिता या दादा कभी कांग्रेस के दिग्गज माने जाते थे। वंशवाद को सलामी देने के मामले में कांग्रेस के सहयोगी भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी सीना ठोंककर दावा किया कि प्रतिभा उनके बच्चों का ही दूसरा नाम है।
राज्यमंत्री जितिन प्रसाद-कांग्रेसी दिग्गज जीतेंद्र प्रसाद के बेटे हैं। सचिन पायलट राजेश पायलट के तो ज्योतिरादित्य सिंधिया माधवराव सिंधिया के बेटे हैं। प्रतीक पाटिल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल के पोते है तो तुषार चौधरी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री अमर सिंह चौधरी के बेटे। अरुण यादव मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव के बेटे हैं तो भरत सोलंकी पूर्व विदेश मंत्री माधव सिंह सोलंकी के बेटे। आरपीएन सिंह कांग्रेसी दिग्गज सीपीएन सिंह के बेटे हैं। बात यहीं नहीं थमती। जिनका शुमार राहुल की युवा ब्रिगेड में नहीं है, ऐसे वारिसों को भी मंत्री पद से निराश नहीं किया गया।
मीरा कुमार (कैबिनेट मंत्री)- पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी।
जी.के.वासन (कैबिनेट मंत्री)- तमिलनाडु के कांग्रेसी दिग्गज जी.के.मूपनार के बेटे।
सलमान खुर्शीद (राज्यमंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के नाती और कांग्रेस नेता खुर्शीद आलम खान के बेटे।
कुमारी शैलजा (कैबिनेट मंत्री)- हरियाणा के कांग्रेसी नेता दलबीर सिंह की बेटी।
परनीत कौर (राज्यमंत्री)- पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी।
ये तो रही कांग्रेस की बात। लेकिन उनका भी हाल जुदा नहीं जो कभी कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाते थकते नहीं थे। कांग्रेस के सहयोगी इस मामले में भी पक्के कांग्रेसी हैं। पार्टियां खानदानी रियासत हो गई हैं। जिस पर राज करने अब आए हैं शहजादे। पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर फारुक अब्दुल्ला पहले खुद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे और अब बेटे उमर अब्दुल्ला के हाथों राज्य की कमान है। यही हाल तमिलनाडु के डीएमके परिवार का है। करुणानिधि के बेटे अझागिरी (कैबिनेट मंत्री) और पोते दयानिधि मारन दोनों कैबिनेट मंत्री हैं।
मनमोहन मंत्रिमंडल में लोकतंत्र के नए सामंतों का दबदबा साफ दिख रहा है। अफसोस ये कि राहुल गांधी के प्रयोग भी कोई आशा नहीं जगाते। आखिर ऐसा कैसे हुआ कि पंजाब में टैलेंट हंट के जरिए आगे आए रवनीत सिंह बिट्टू भी पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के बेटे हैं। सांसद बन चुके हैं, मंत्री भी बन जाएंगे।
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