नई दिल्ली। मनमोहन सिंह ने मंत्रिमंडल का गणित तो हल कर लिया लेकिन राज्यों को बराबर नुमाइंदगी देने में नाकाम रहे। कई ऐसे राज्य थे जिन्हें सीटें तो पर्याप्त मिलीं पर मंत्रिमंडल में नुमाइंदगी नहीं। यूपी और बिहार तो मंत्रिमंडल में जगह बनाने में पिछड़ से गए। प्रधानमंत्री ने बातचीत में इसके लिए प्रतिभाओं की कमी को जिम्मेदार ठहराया है।
यूपी में सालों बाद कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत मिली। कुल 21 सीटें जीत कर पार्टी लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर थी लेकिन राज्य को जितनी नुमाइंदगी मिलनी चाहिए थी नहीं मिली। राज्य को मिले केवल 5 राज्यमंत्री। कैबिनेट में एक भी नहीं। सीनियरिटी देखते हुए सलमान खुर्शीद को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी लेकिन उन्हें भी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की कुर्सी से संतोष करना पड़ा। दूरसंचार जैसे अहम मंत्रालय देख चुके बेनी प्रसाद वर्मा को तो पूछा ही नहीं गया। जगदम्बिका पाल दिल्ली में लॉबिंग करके भी निराश लौटे। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में पीएम ने इसके लिए प्रतिभाओं की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
यूपी से सोनिया और राहुल दोनों एम पी हैं। यूपी को राहुल की प्रयोगशाला कहा जाता है लेकिन यूपी से कम मंत्री क्यों बने। गांधी परिवार के पास इसका एक अनोखा जवाब है। पत्रकारों ने जब सवाल पूछे तो सोनिया गांधी ने राहुल की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसकी वजह राहुल गांधी हैं। वो मंत्री बनना ही नहीं चाहते। राहुल ने इसका जवाब कुछ यों दिया-मैं एक वक्त में एक ही काम कर सकता हूं, छह नहीं। मेरी प्राथमिकता इस समय संगठन के लिए काम करने की नहीं है।
यही हाल बिहार का भी रहा। यूं तो बिहार में पार्टी को सीट सिर्फ एक मिली। लेकिन इस बार बिहार में पार्टी का वोट शेयर बढ़ा था। पार्टी ने अकेले दम बिहार की जंग लड़ी। पार्टी के तेवर से लग रहा था कि वो यूपी की तरह बिहार में भी अपनी जमीन दोबारा हासिल करना चाहती है। लेकिन मंत्रिमंडल में बिहार से केवल एक एंट्री है जगजीवन राम की बेटी और पिछली सरकार में भी मंत्री रहीं मीरा कुमार। जबकि बिहार से कुछ और लोगों को मौका दिया जा सकता था।
कई राज्यों में आंकड़े कांग्रेस के मन मुताबिक नहीं थे, लेकिन कैबिनेट में उनकी नुमाइंदगी उम्मीद से ज्यादा है। 6 सीटों वाले जम्मू कश्मीर से फारुक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद दो कैबिनेट मंत्री हैं। हिमाचल में जहां सिर्फ एक सीट कांग्रेस को मिली वहां से भी आनंद शर्मा और वीरभद्र सिंह दो कैबिनेट मंत्री बनाए गए और कर्नाटक जहां कांग्रेस को 28 में से सिर्फ 6 सीटों पर जीत मिली वहां कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखने के लिए कुल 4 मंत्री बनाए गए। इनमें एस एम कृष्णा, वीरप्पा मोइली और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता कैबिनेट में हैं। एक सीट राज्यमंत्री की भी है।
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