नई दिल्ली। केन्द्र में सत्ता का फाइनल मुकाबला मनमोहन सरकार के नाम रहा। लोकसभा में विश्वासमत पर दो दिन चली बहस के बाद हुए मतदान में 275 सांसदों ने सरकार के हक में फैसला दिया जबकि 256 सांसदों ने विरोध में। 10 सांसदों ने वोट ही नहीं डाला।
19 रन से मनमोहन सिंह सत्ता का ये मैच जीत गए। इस जीत से यूपीए सरकार के संकटमोचक अमर सिंह का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उन्होंने अपने विरोधियों पर आग उगली और फिर चुन चुन कर कोसा। आखिर सत्ता का उनका कैलकुलेशन काम जो आ गया था।
सूत्र बताते हैं कि विपक्ष के कुल 12 सांसदों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर, पार्टी व्हिप को ठेंगा दिखाया। कुछ ने यूपीए के हक में वोट डाला तो कुछ ने यूपीए को फायदा पहुंचाने के लिए वोट ही नहीं डाला।
यूपीए के हक में क्रॉस वोटिंग करने वाले सांसदों में कर्नाटक से मंजूनाथ, कर्नाटक से ही टी एस सांगलियान, बीजेपी के ही बलरामपुर से सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह, जेडीयू के बिहार से सांसद रामस्वरूप प्रसाद, शिवसेना के तुकाराम रेंगे पाटिल और टीडीपी के दो सांसद - आदिकेशुवुलू नायडू और एम जगन्नाथ ने यूपीए को वोट दिए।
इसके अलावा वोट नहीं देकर यूपीए को फायदा पहुंचाने वाले थे - कर्नाटक से मनोरमा, मध्यप्रदेश से बीजेपी के सांसद चौधरी चंद्रभान सिंह, पंजाब के रोपड़ से अकाली दल सांसद सुखदेव सिंह लिम्डा, महाराष्ट्र से हरिभाई राठौड़ और बीजेडी का एक अन्य सांसद।
मतविभाजन से पहले पीएम मनमोहन सिंह ने अपना भाषण शुरू किया लेकिन वह उस विपक्ष के भारी विरोध के कारण पूरा नहीं कर सके। पीएम ने भाषण अधूरा ही छोड़ दिया।
इससे पहले विश्वास मत पर दो दिन चली बहस के दौरान मंगलवार को उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब बीच बहस में शाम चार बजे एनडीए की ओर से बीजेपी के मुरैना, मध्यप्रदेश से सांसद अशोक अर्गल ने नोटों से भरा एक बैग लहराकर दावा किया कि यूपीए की ओर से ये पैसा सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए दिया गया है।
इसी के साथ सदन में हंगामा आरंभ हो गया। इसके बाद लोकसभा की बैठक को शाम पांच बजे और फिर छह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने इस मुद्दे पर विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है। लोकसभा की कार्रवाई छह बजे शुरू हुई लेकिन इसे तुरंत साढे़ छह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
साढे़ छह बजे फिर कार्रवाई शुरू हुई। कुछ सदस्यों के भाषण के बाद प्रधानमंत्री जवाब देने के लिए खड़े हुए।
शोरशराबे के कारण वे भाषण नहीं दे पाए। उनके भाषण को पढ़ा हुआ मान लिया गया। इसके बाद स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने वोटिंग शुरू करने की घोषणा की।
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