नई दिल्ली। जनता दल यूनाईटेड ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उसने गठबंधन धर्म का निर्वाह नहीं किया। हालांकि नीतीश कुमार की पार्टी ने खुलकर ये नहीं कहा कि उसका बीजेपी से तालमेल तोड़ने का इरादा है। लेकिन एनडीए की हार के बाद पार्टी ने कहा है कि जब बीजेपी राजनीति करती है तो उसे इस बात का ध्यान होना चाहिए कि उसके किस बयान से सहयोगी पार्टियों का नुकसान हो रहा है।
दरअसल बीजेपी अभी अपनी हार का पोस्टमार्टम कर ही रही है कि जनता दल यूनाईटेड ने ये कहकर उसपर दबाव बना दिया है कि बीजेपी ने कई जगहों पर राजनीतिक बेइमानी की है। पार्टी झारखंड के मसले पर बात कर रही थी जहां उसका आरोप है कि बीजेपी ने जेडीयू को हराने का काम किया है। जेडीयू ने कहा कि बीजेपी को गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए।
जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इस बात पर चर्चा हुई कि बीजेपी इमानदारी से गठबंधन धर्म निभाए। कार्यकारिणी की बैठक में ये भी कहा गया कि वरूण गांधी के बयान से बीजेपी के सहयोगियों को नुकसान हुआ और बीजेपी को ये बात ध्यान रखनी चाहिए। कार्यकारिणी में ये बात भी उठी कि जब एनडीएन ने आडवाणी को नेता चुन लिया तो बीच में बीजेपी के भीतर से प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी ने नाम की चर्चा ने भी एनडीए का बेड़ा गर्क किया।
चुनाव के पहले से ही इस बात पर कयास लगाया जा रहा था कि नीतीश बीजेपी का साथ छोड़ सकते हैं। इस चर्चा ने उस वक्त और जोर पकड़ लिया जब राहुल गांधी ने खुलेआम नीतीश की तारीफ कर दी थी। इन कयासों के बीच जेडीयू के इस बयान ने राजनीतिक हल्कों में इस चर्चा को और गर्मा दिया है कि क्या जेडीयू बीजेपी को टाटा कहने वाली है।
मालूम हो कि जेडीयू बिहार में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रही है। इसलिए इस बात की गुंजाइश तो नहीं है कि नीतीश बीजेपी से अलग होकर अपनी सरकार को दांव पर लगाएंगे। लेकिन इतना तय है कि जेडीयू ने अभी से इस बात की भूमिका बनानी शुरू कर दी है कि दोनों पार्टियों के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। ये कहीं न कहीं भविष्य की राजनीति का संकेत हैं।
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