परमाणु करार जैसे मामलों में हमें अपने नेशनल इंटरेस्ट का ध्यान रखना चाहिए। देश का नेतृत्व फैसला सोच समझ कर करता है। उस पर भरोसा करना चाहिए।
Jay:बुरा मत मानिए लेकिन मुझे आपका नेटवर्क कांग्रेस पार्टी का अंधा सपोर्टर लगता है। हमें आपका आईबीएन 7 हिंदू विरोधी लगता है ।
आशुतोष:ये आपकी राय है और मैं आपकी राय का सम्मान करता हूं लेकिन आपसे सहमत हूं, ये जरूरी नहीं है।
Syed Abbas Haider:आशुतोष जी, मीडिया में खबरें आ रही हैं कि एक सांसद की क़ीमत 25 करोड़ है। क्या ये सच है? अगर ऐसा है तो ये शक्ति परीक्षण है या पैसा परीक्षण, हमारे देश का क्या होगा?
आशुतोष: इस तरह की बातें हमने भी सुनी हैं लेकिन इसके कोई सबूत नहीं हैं।
Anil:क्या आपको लगता है की विश्वास मत जीतने के बाद सरकार कार्यकाल पूरा कर लेगी?
आशुतोष:कहना मुश्किल है।
Avinash Jadhav:मैं फ़िलहाल अमेरिका में पढ़ रहा हूं। मैंने आपका प्रोग्राम देखा और गर्व महसूस हुआ कि आप जैसे लोग भी हैं जो निडर होकर अपनी राय पेश करते हैं। संसद में कई लोग ऐसे भी हैं जो किसी भी तरह सांसद कहलाने के लायक नहीं हैं। मीडिया को लोगों में अवेयरनेस पैदा करनी चाहिए कि देश को पढ़े-लिखे सांसदों की ज़रूरत है जो देश को सही तरह से दिशा दें।
आशुतोष:शुक्रिया दोस्त । हम सिर्फ अपना काम कर रहे हैं और हमारे जैसे ढेरों पत्रकार निडरता से अपनी बात रखते हैं।
Narayan Singh:कृपया बताएं कि 123 और हाइड एक्ट में क्या है। ना तो इसकी चर्चा संसद में हो रही है, ना बाहर और मुझे जैसा लग रहा है कि कहीं देश को गिरवी तो नहीं रख दिया गया?
आशुतोष:यकीन मानिए गिरवी नहीं रखा जा रहा है।
Gaurav Prasad:करार के बाद भारत की ऊर्जा ज़रूरत का कितना % परमाणु ऊर्जा से मिल पाएगा? अगर मात्र 6% ही मिलना है तो ये डील किस प्रकार फ़ायदेमंद है? डील के पीछे अमेरिका का क्या लालच है? क्या अमेरिका का कोई स्वार्थ नहीं?
आशुतोष:ये कहना कि अमेरिका का स्वार्थ नही है, गलत है लेकिन हमें अपना भी स्वार्थ देखना चाहिए। हमें बडी़ ताकत बनने के लिए डील के साथ अमेरिका से दोस्ती भी करनी चाहिए लेकिन थोड़ा समझ कर।
Abhishek Kumar:क्या डील से, बिजली से अभी का हालिया खाद्य संकट हल हो जाएगा? मैं बिजली के खिलाफ़ नहीं हूं पर बिजली को नेता लोग ऐसा प्रोजेक्ट कर रहे हैं जैसे अगर बिजली नहीं मिली तो हमलोग मर जाएंगे। मैं इस बेकार की हायतौबा को नहीं समझ पा रहा हूं।
आशुतोष:ऊर्जा के लिए डील जरूरी है, ऐसा लगता है । लेकिन साथ ही भारत और अमेरिका की नजदीकी भी जरूरी है अगर भारत को ग्लोबल पावर बनना है तो।
Ramnik : मैं अमेरिका से हूं। हम सब यहां से यही दुआ कर रहे हैं कि सरकार को समर्थन मिले। अगर सरकार को लालच होता तो वह सरकार को दांव पर नहीं लगाती। हम सब भारतवासियों को सरकार का समर्थन करना चाहिए।
आशुतोष:मैं आपकी राय से सहमत हूं।
M L kumavat:क्या मनमोहन सरकार सदन में विश्वासमत हासिल कर लेगी? आपके अंदाज़ से कांग्रेस ने कितना करोड़ रुपया दांव पर लगाया है?
आशुतोष:मुझे लगता है सरकार बहुमत हासिल कर लेगी। ये बताना मुश्किल है कि कितने करोड़ लेकिन पैसे खर्च हुए हैं, इसमें शक नहीं है।
RAJ:सांसद को अगर ज़ेल हो तो उसकी सदस्यता निलंबित या खत्म नहीं होती पर अगर सरकारी कर्मचारी को 24 घंटे की ज़ेल हो तो उसे निलंबित कर दिया जाता है। अगर किसी अपराध में कोर्ट सजा देता है तो उसको बर्खास्त कर दिया जाता है। सांसद और सरकारी कर्मचारी दोनों ही लोक सेवक होते हैं, फिर ऐसा फ़र्क क्यों?
आशुतोष:आपकी बात सही है लेकिन कानूनन इन दंड पाए सांसदों को वोट देने का अधिकार है जब तक कि वो सांसद है। ये कानून बदलना चाहिए।
Gopal Parekh:मैं हांगकांग में रहता हूं और आज आईबीएन 7 पर संसद में हो रही बहस देख रहा था। यहां के मेरे चीनी दोस्त भी देखने लगे। तब मेरे लिए बहुत ही शर्मनाक हो गया, सब पेट पकड़-पकड़ कर हंस रहे थे। क्या हमारे नेता कभी चर्चा करने का सही तरीक़ा नहीं सीख पाएंगे?
आशुतोष:हमारे नेताओं का स्तर गिरा है, इसमें संदेह नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन ये भी सीखेंगे और देश की जनता इनको सबक सिखाएगी। आप यकीन रखें।
Surjit Singh Roma:हम कई साल से आईबीएन7 से लाइव प्रोग्राम देखते हैं। लोकसभा में जो हंगामा हो रहा है, बहुत ही दुखदाई है। सरकार बचाने की बजाए सरकार गिराने की ज्यादा सोच रहे हैं। अगर सरकार गिरती है तो बोझ किस पर पड़ेगा, जनता पर। लेकिन मंत्रियों को ये सब नहीं दिख रहा उन्हें सिर्फ़ कुर्सी चाहिए।
आशुतोष:हम आपके साथ हैं और आपकी भावना समझते हैं। आइए उम्मीद करें कि इन नेताओं को जल्द सदबुद्धि आए।
Manoj Kumar Bharti:एक ग़रीब आदमी अपने बच्चों को बिजली की रोशनी में भूखा सुलाना पसंद करेगा या अपने बच्चों का पेट भरना पसंद करेगा ?
आशुतोष:पेट भरना जरूरी है लेकिन रोशनी भी चाहिए। और रोशनी के लिए परमाणु डील ठीक है।
Manoj Kumar Bharti:अमेरिका की उत्सुकता बता रही है कि दाल में कुछ काला है?
आशुतोष:दाल में काला कहना मुनासिब नहीं है। हमें इन मामलों में अपने नेशनल इंटरेस्ट का ध्यान रखना चाहिए। देश का नेतृत्व फैसला सोच समझ कर करता है। उस पर भरोसा करना चाहिए।
Sunil Choudhary:डील को ठुकराकर ये नेता क्यों आगे की पीढ़ियों के रास्ते बंद कर रहे हैं, क्या ये ठीक है?
आशुतोष:मैं इस डील के पक्ष में हूं। लेकिन संसद का फैसला अंतिम होता है और हम सबको उसे स्वीकार करना चाहिए।
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