IBN7 की खास पेशकश मुद्दा में इस बार बात हुई सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया की। पिछले एक महीने से जो एक खबर लगातार सुर्खियां बटोर रही है वो है नस्लवाद यानी RACISM। ऑस्ट्रेलिया में लगातार भारतीय छात्रों पर हमले किए जा रहे हैं। और ये आंकड़ा लगातार हर दिन, दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। ‘मुद्दा’ में ये खंगालने की कोशिश की गई कि जो कुछ ऑस्ट्रेलिया में हो रहा है वो सीधा-सीधा, खालिस नस्लवाद है या फिर ये कानून व्यवस्था की एक दिक्कत है।
इस मुद्दे पर बहस करने के लिए मौजूद थे अरिंदम चौधरी (मैनेजमेंट गुरु, फिल्में भी बनाई और IIPM चलाते हैं), आशीष नंदी (समाजशास्त्री व देश के बेहतरीन सोशल साइंटिस्ट साइको एनालिस्ट में से एक), मुकुल खन्ना( छात्र जो 9 महीने ऑस्ट्रेलिया में रहा, 2 महीने पहले ही वापस लौटा), विवेक कुमार (दलित चितंक हैं और जेएनयू में पढ़ाते हैं), साथ ही साथ मुंबई से चर्चा में हिस्सा लिया एलिक पद्मसी (एपी एडवर्टाइजिंग के सीईओ) शो की एंकरिंग संदीप चौधरी ने की।
संदीप चौधरी: पहला सवाल मुकुल आपसे। जब आप ऑस्ट्रेलिया गए तो आपने भी हसीन सपने देखें होंगे कि मैं अपना भविष्य बहुत बेहतरीन बनाने जा रहा हूं। 9 महीने पहले जब आप वहां गए तो आपको लगा कि यहां कोई दिक्कत हो सकती है या सबकुछ था।
मुकुल: जब में वहां पर गया तो ऐसा नहीं था कि जैसा कि दिखा रहा है कि अब छात्रों को टारगेट बनाया जा रहा है। ऐसा वहां पहले से होता आ रहा है।
संदीप चौधरी: अरिंदम ऑस्ट्रेलिया सरकार कह रही है कि ये लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन ज्यादा है। ये जहन में नहीं है कि ऑस्ट्रेलियन रेसिस्ट नहीं होते। आप इस लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन मानेंगे या ये खालिस नस्लवाद है।
अरिंदम: ये एकदम बेकार बात है, ये बहुत शर्मनाक बात है कि ऐसा लगातार होता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में आज से 30 साल पहले तक भारतीयों को नागरिकता नहीं दी जाती थी।
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