जयपुर/भागलपुर। जब पहनने-ओढ़ने की बात होती है तो पहली नजर भागलपुर की सिल्क साड़ी और जयपुर ज्वैलरी पर जाती है। क्योंकि इनकी बनावट ही ऐसी होती है कि पहनते ही खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है ये उद्योग गुमनामी के कगार पर है। जी हां, अगर इसी तरह चलता रहा तो ये शहर इतिहास के पन्नों में दब कर रह जाएंगे।
दरअसल महंगे और रंगीन रत्न या डिजाइनर ज्वैलरी खरीदनी है तो लोग सीधे जयपुर की ओर रुख करते हैं। लेकिन जयपुर का ये हीरा-जवाहारात उद्योग संकट में है। अमेरिका की महामंदी ने देश के कीमती पत्थरों का व्यापार चौपट कर दिया।
मंदी की वजह से यहां हजारों कारीगरों के पास काम नहीं है। यहां के रत्नों की एक पोलिसिंग यूनिट में दो साल पहले 50 कारीगर काम करते थे, लेकिन अब महज 4 बचे हैं। साफ-साफ कहें तो रत्न तैयार करने के काम में 95 फीसदी की गिरावट आई है।
पिछले एक साल में देश के रत्नों के एक्सपोर्ट में 35 फीसदी से ज्यादा की गिरावाट दर्ज की गई। 2200 करोड़ के हीरे-जवाहारात के एक्सपोर्ट का कारोबार 1200 करोड़ पर सिमट गया है। एक सर्वे के मुताबिक मंदी की वजह से अकेले राजस्थान में इस उद्योग में लगे 2 लाख में से 50 हजार लोग बेरोजगार हो चुके हैं। इनकी आस अब बजट पर टिकी है।
वहीं, बिहार का भागलपुर जिला जो कभी भारत का नम्बर वन सिल्क उद्योग के नाम से मशहुर हुआ करता था। लेकिन अब ये भागलपुर शिल्क उद्योग बंद के कागार पर आ गया है। यहां के शिल्क उद्योग में काम करने वाले मजदुर और कारीगरों का पलायन शुरू हो गया है। वहीं कारखाना के मालिक अब भुखमरी के कागार पर आ गए हैं।
सरकार की बेरुखी के चलते भागलपुर का सिल्क उद्योग बंद होने की कगार पर है। लेकिन सरकार बेपरवाह है। इन कारीगरों के दर्द को कौन समझेगा। क्या आने वाले बजट के बाद दूर होंगी इनकी मुसीबतें।
दरअसल, कच्चे माल और विदेशों से आने वाले कीमती धागे की किल्लत के चलते हर रोज कारखानों में ताले लग रहे हैं। सरकार की अनदेखी से आजिज़ आ चुके कारोबारी अब टूट चुके हैं। हर साल ये उम्मीद करते हैं कि सरकार उनके जख्मों पर मरहम लगाएगी। लेकिन नतीजा सिफर ही रहता है। इस बार भी उम्मीद सरकार से ही है क्योंकि इसके अलावा कोई चारा भी नहीं हैं। इस खबर पर आप अपनी राय दें।
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