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भक्षक बना रक्षक, रंग लाई एक शिकारी की मेहनत

Posted on Jun 24, 2009 at 06:45pm IST | Updated Jun 24, 2009 at 06:57pm IST

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हाड़ोती। अपनी लालच और जरूरतों के लिए हम पशु पक्षियों को भी नुकसान पहुंचाने से बाज़ नहीं आते। कुछ प्रजातियां बदलते मौसम के चलते ख़त्म हो गईं तो कुछ शिकार की भेंट चढ़ रही हैं। ऐसे में राजस्थान के एक शख्स की कोशिशें एक मिसाल हैं। वो खुद कभी सारस का शिकारी था लेकिन आज अपने पिता के साथ मिलकर उन्हें बचाने की कोशिश में जुटा है।

दरअसल कुछ साल पहले तक तलाबों और पोखरों में आसानी से नजर आ जाने वाले सारस पक्षी की संख्या दिनों दिन कम होती जा रही है। इंसान के लालच की वजह से आज हालात ये हैं कि इसे देखने के लिए लोगों को तालाब और पोखर की जगह चिड़ियाघर जाना पड़ता है।

आईबीएन7 ने सिटीजन जर्नलिस्ट सुरेन्द्र के साथ मिलकर मामले को आगे बढ़ाया। सुरेन्द्र राजस्थान के हाड़ोती गांव का रहने वाला है और जहां समुदाय से संबंध रखता है। सुरेन्द्र के मुताबिक हमारे समुदाय में सदियों से सारस पक्षी के शिकार और भोजन के लिए उनके इस्तेमाल की परंपरा है। सारस के शिकार के साथ-साथ लोगों ने दवाई के लिए इनके अंडो को भी नहीं छोड़ा।




मालूम हो कि सारस एक दुर्लभ पक्षी है और इनकी संख्या ज्यादा नहीं क्योंकि एक तालाब में एक ही जोड़ा रहता है। जैसे-जैसे तालाब खत्म होते गए सारस की प्रजातियां भी विलुप्त होती गईं ऐसे में इनका शिकार करना इस पक्षी के अस्तित्व को हमेशा के लिए खत्म करने जैसा है। सारस का इस तरह शिकार सुरेन्द्र से देखा नहीं गया और उन्होंने सारसों को बचाने की एक मुहिम शुरू की।

वन विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों की मदद से सुरेन्द्र ने गांव और आसपास के इलाकों में जनसभाएं कराई। गांववालों को समझाया कि सारस हमारी प्राकृतिक धरोहर का हिस्सा हैं। इस कोशिशों का असर हुआ और शिकार में कुछ कमी आई।

दरअसल शिकारियों को रोकने के लिए सुरेन्द्र ने तालाबों के किनारे कुछ पेड़ों पर मचान बनाए। गर्मी, सर्दी बरसात चाहे जो भी मौसम हो हर दिन चार से पांच घंटे बैठकर में शिकारियों की निगरानी करता है।

सुरेन्द्र ने जब भी सारस का शिकार करते हुए शिकारियों को देखा तुरंत वन विभाग को सूचित कर देता। इसको लेकर कई बार शिकारियों ने सुरेन्द्र पर हमला भी किया लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी मुहिम को जारी रखा।

परिणामस्वरूप इलाके में सारस का शिकार करना अब पूरी तरह खत्म हो चुका है और सारसों की संख्या बढ़ने लगी है।


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