मुंबई। छह जुलाई को पेश होने वाले बजट में देश के छोटे और मंझोले व्यापारियों को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से काफी उम्मीदें हैं।
मुंबई में कारोबार करने वाले सैकड़ों चमड़ा व्यापारी दुनियाभर में चल रही मंदी से परेशान हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी माल की वजह से भी वे नुकसान का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यूपीए सरकार के नए बजट में चमड़ा उद्योग को कितनी रियायत मिलती है उसपर मुंबई के चमड़ा व्यावसायियों की नजरें टिकी हुई हैं।
चमड़े की जैकेट, चमड़े के जूते और लेदर कैप पहने किसी शख्स के बिना शायद ही कोई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म पूरी हुई हो। लेकिन आज मुंबई की यही लेदर इंडस्ट्री अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। मंदी की वजह से लेदर उद्योग का वजूद खतरे में है। विजय धारावी पेशे से लेदर एक्सपोर्टर हैं। ग्लोबल मंदी से पहले विजय की फैक्ट्री से हजारों जोड़ियां सैंडल एक्सपोर्ट होती थीं लेकिन मंदी की मार ने सब कुछ चौपट कर दिया।
विजय अकेले नहीं हैं धारावी की ज्यादातर लेदर फैक्ट्रियों का यही हाल है। मुंबई में धारावी के अलावा चेंबूर और अंधेरी में भी लेदर की तमाम फैक्ट्रियां हैं। मुंबई के लेदर प्रॉडक्ट का सालाना कारोबार लगभग एक हजार करोड़ रुपए का है। लेकिन पिछले एक साल में लेदर के कारोबार में लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं चाइना के लेदर ने भी कारोबारियों की कमर तोड़कर रख दी है। लेदर के तैयार माल पर सरकार 23 फीसदी टैक्स तो वसूलती है लेकिन इंडस्ट्री को आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है।
लेदर के व्यापारी चाहते हैं कि सरकार टैक्स में कटौती करके उनका बोझ कम करे और लेदर उद्योग को मंदी से उबारने में मदद करे। वर्ना वो दिन दूर नहीं जब देश की आर्थिक राजधानी में लेदर उद्योग से जुड़ी फैक्ट्रियों पर ताले लग जाएंगे और इससे जुड़े लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
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