मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के 10वीं की परीक्षा को वैकल्पिक बनाने के प्रस्ताव के बाद इस पर बहस भी तेज हो गई। क्या सिब्बल जी जल्दबाजी में तो नहीं है या फिर ये सिस्टम भारत के बच्चों और पेरंट्स के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इसे लेकर आशंकाएं, उम्मीदें काफी ज्यादा है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं, अपनी राय देकर खुली बहस की शुरुआत करें। आपकी राय को नीचे प्रकाशित किया जाएगा। राय देने के लिए यहां क्लिक करें।
इरफान गीते
हां, 10वीं के एग्जाम खत्म करने का फैसला बिल्कुल सही है। इसे काफ़ी साल पहले करना था। कपिल सिब्बल जी को मुबारकबाद कि उन्होंने इस बारे मे ध्यान दिया।
शैलेश ठाकुर
दसवीं की परीक्षा ख़त्म नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस परीक्षा के होने से विद्यार्थियों पर प्रेशर बना रहता हैं और बोर्ड का डर भी। अगर यह परीक्षा नहीं होगी तो स्टूडेंट के मन में कोई डर नहीं बचेगा। इससे पास होने का पर्सेंट तो बढ़ेगा मगर स्तर नही। इस ग्रेडिंग प्रणाली लागू होने से शिक्षा का स्तर बहुत ही गिर जाएगा। बिना डर के कोई भी बच्चा पढ़ाई ठीक से मन लगा कर नहीं करेगा क्योंकि उसको तो मालूम ही हैं कि वो पास होने वाला हैं। अगर रिज़ल्ट ही सामने है तो पढ़ाई किस बात की?
राम शुक्ला
Sibal ji in hurry , no examination at 10th standard is his idea. What is the rational behind this. He should ask for public referendum for this change. Indian government should take consideration of international educational system. Why can't start lower and higher level syllabus for 10th standard. Those who are poor in study can opt lower level and they won't fail. Govt. can reserve few low profile job for these lower level student and medicine and administration job can be reserve for higher level group. Also all student should have right to study higher level as mature student so no body can miss their chance foe higher level job.
Kamal Tuteja
अगर दसवीं के एग्ज़ाम ख़त्म कर दिए गए तो दसवीं की वैल्यु भी ख़त्म हो जाएगी। इसका मतलब यह होगा की हायर एग्ज़ाम कॉंम्पटीशन में कोई क्राइटेरिया नहीं रहा जाएगा। फिर तो केवल 10+2 की ही वैल्यु रह जाएगी।
दिलीप कुमार झा
दसवीं बोर्ड का होना बहुत ज़रूरी है। आज का युग प्रतियोगिता का युग है जिससे बच्चों की प्रतिभा निखर कर सामने आती है और बच्चे अपने उज्ज्वल भविष्य के निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं। अगर दसवीं बोर्ड का परीक्षा समाप्त किया जाता है तो शिक्षा का स्तर गिरेगा और प्रतिवाभान बच्चे का मनोबल भी गिरेगा। संभव हो सके जो बच्चे पढ़ने में कमजोर हो उसे फेल ना करके पास कर दिया जाय।
मधुकर कुमार
जीवन एक परीक्षा है जिसके अनुभव 10वीं से ही मिलने ही जरूरी हैं।
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