नई दिल्ली। कातिल सोचता है कि उसने दस्ताने पहनकर गोली चलाई है और कानून कभी उस तक नहीं पहुंच सकता मगर पुलिस ने कातिल के चेहरे से नकाब उतारने का तरीका हासिल कर लिया है। एक ऐसी अचूक तकनीक जो बरसों पुराने केसों की बंद फाइलें खोल देगी।
वाकया अमेरिका में कोलोरेडो के बोल्डर शहर का है। 14 साल पहले गोली चली और ले ली गई एक इंसान की जान। हत्यारे फरार हो चुके थे पर एक चीज पीछे छूट गई थी और बोल्डर पुलिस ने उसे संभालकर रख लिया। वो था कारतूस का खोखा। कारतूस का ये खोखा बरसों किसी दराज में पड़ा रहा और 14 साल बीत गए। तभी बोल्डर सिटी पुलिस को पता चला कि इंग्लैंड की नॉर्थेंप्टनशायर पुलिस ऐसे मामले सुलझाने में जुटी है तो 9 मिलीमीटर का पीतल का ये खोखा उसने इंग्लैंड भेज दिया। और वहां चमत्कार हो गया।
नॉर्थेंप्टनशायर पुलिस ने कारतूस के इस खोखे से उंगलियों के निशान उठा लिए। कत्ल के 14 साल बाद फॉरेंसिक विज्ञान का ये चमत्कार किया लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में रिसर्च फैलो डॉ जॉन बॉन्ड ने। उन्होंने वो कर दिखाया जो दुनिया में अभी तक कोई फॉरेंसिक साइंटिस्ट नहीं कर सका था। कोलोरेडो पुलिस ने वो फाइल अब फिर खोल दी है।
जॉन इस वक्त नॉर्थेंप्टनशायर पुलिस के साइंटिफिक सपोर्ट मैनेजर हैं। वो कहते हैं कि कि किसी धातु की सतह से उंगलियों के निशानों के मिट जाने का मतलब ये नहीं कि वो हमेशा के लिए मिट गए। उंगलियों के निशान बनते हैं पसीने से। पसीने में मौजूद नमक, पानी और तेल उन्हें किसी भी चीज पर दर्ज कर लेता है। केमिकल रिएक्शन की वजह से पसीना धातु को खराब करना शुरू कर देता है। सतह भुरभुरी होनी शुरू हो जाती है इसलिए जब गोली चलती है तो कारतूस के खोखे पर लगा उंगलियों का पसीना गर्मी की वजह से सूख जाता है अब तक इसे उतारना मुश्किल था।
लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के रिसर्च फैलो जॉन बॉन्ड ने देखा कि इस धातु से बिजली पास हो सकती है। उन्होंने कारतूस के खोखे से ढाई हजार वोल्ट की बिजली गुजारी। इसके बाद उस पर बारीक कार्बन पाउडर डाला, तो कारतूस के खोल पर उंगलियों के निशान उभर आए। जॉन कहते हैं कि चाहे आप कारतूस के खोल को गर्म साबुन के पानी में धो डालें या उसे अच्छी तरह पोंछ लें उंगलियों के निशान नहीं मिटेंगे। फायरिंग के दौरान गोली जितनी गर्म होगी, निशान उतने ही साफ होंगे।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल ये होगा कि आखिरी बार पिस्तौल किसने लोड की थी। जाहिर है अब पुलिस कातिल के बेहद करीब पहुंच जाएगी, ऐसा कम ही होगा कि गोली भरे कोई और चलाए कोई। फिंगरप्रिंटिंग में नई खोज की खबर जैसे ही अमेरिका पहुंची, वहां की पुलिस हरकत में आ गई। केस था अमेरिका की मोस्ट वांटेड लिस्ट में से एक। इस केस में पुलिस के पास वो कारतूस और हथियार तो था जिससे कत्ल किया गया पर वो कातिल का सुराग नहीं लगा सकी। अब इस नई तकनीक के भरोसे अमेरिकी पुलिस जल्द कातिल तक पहुंचने वाली है।
ये 9 दिसंबर 2007 की रात थी। अमेरिका के टेक्सस का नॉर्थ रिचलैंड हिल्स इलाके में एक अनजान शख्स ने मैरियेन विल्किंसन के घर पर दस्तक दी। मैरियेन ने दरवाजा खोला तो बाहर मौजूद हत्यारे ने उसपर फायरिंग शुरू कर दी। मैरियेन की मौत हो गई। पुलिस को पता चला कि नॉर्थ रिचलैंड हिल्स में मैरियेन के मकान जैसा दूसरा मकान भी था। इसकी मकान मालकिन का कुछ समय पहले ही तलाक हुआ था। उसका अपनी ट्रक कंपनी को लेकर पति से झगड़ा चल रहा था। तब पुलिस को लगा कि हो सकता है कि हत्यारा उस महिला को मारने गया और गलती से मारी गई मैरियेन।
मैरियेन के कत्ल के कई महीने बाद नॉर्थ रिचलैंड हिल्स से पुलिस को एक हैंडगन मिली। इसकी बैलिस्टिक जांच में पता चला कि इसी से मैरियेन पर गोलियां चलाई गई थीं। पुलिस के पास खोखे पहले से मौजूद थे। मैरियेन के हत्यारों तक पहुंचने की कोशिश में टैक्सस पुलिस अब इंग्लैंड पहुंची है। उसे उम्मीद है कि जॉन बॉन्ड कारतूसों के खोखे से कातिल के निशान उठा सकते हैं।
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