नई दिल्ली। समलैंगिक संबंधों को गैरकानूनी करार देने वाली धारा 377 को बदलने का मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला गया है। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि इस मामले में लंबी बहस की जरूरत है।
रविवार को देश के कई महानगरों में नाचते गाते लोग खुशी का इजहार करने सड़कों पर निकले थे। खबर थी कि जल्द ही सरकार धारा 377 में बदलाव लाने वाली है। अब समलैंगिकता को अपराध नहीं समझा जाएगा। लेकिन ठीक एक दिन बाद सरकार ने साफ कर दिया कि फिलहाल ऐसा नहीं होने वाला। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि समलैंगिकता के मामले में अभी और बहस की जरूरत है।
आजाद ने कहा कि इस मसले के समाधान के लिए सभी पार्टियों के बीच एक व्यापक सहमति होनी चाहिए। सांसदों को इस पर कुछ सवाल उठाने चाहिए और मैं इस मामले में अपने या अन्य लोगों के विचारों को थोपना नहीं चाहता। मैं इस मुद्दे पर सरकार की एक राय और पूर्ण सहमति चाहता हूं।
आजाद ने कहा कि मैं अपना और अपने मंत्रालय का विचार नहीं जाहिर करना चाहता। यह एक बड़ा मुद्दा है और इसे लेकर नकारात्मक और सकारात्मक दोनों पक्ष हैं। इसमें देश की संस्कृति और रोग व प्रताड़ना जैसी समस्या शामिल है। इस मुद्दे पर एक व्यापक बहस होनी चाहिए।
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