IBN7 IBN7

[+] 12 और खबरें

बेटे की मौत का इंसाफ मांगता एक पिता

Posted on Jun 30, 2009 at 17:54 | Updated Jun 30, 2009 at 18:01

Email
Print
0

गुड़गांव। सड़कें-हाइवे और उन पर तेजी से दौड़ती जिंदगी, हमने इसे नाम दिया है तरक्की का। लेकिन ये सड़कें और हाइवे ही अगर हमारी मौत की वजह बन जाएं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दिल्ली से सटे गुड़गांव का एक्सप्रेसवे करोंड़ों की लागत से बना लेकिन फिर भी इसमें रह गईं ऐसी खामियां जिससे कई जानलेवा हादसे हुए।

सिटीज़न ज़र्नलिस्ट के.एस. आनंद ने भी अपने बेटे को खोया लेकिन फिर उन्होंने तय किया की अब और हादसे नहीं होने देंगे।

आनंद बताते हैं कि उनका बेटा राहुल बहुत होनहार बच्चा था। वो एक बेहतरीन डांसर था और उसने पैन्टालून्स के लिए कई बार मॉडलिंग भी की। राहुल आज हमारे साथ होता तो साढ़े 19 साल का होता। उसके बिना हम रह तो रहे हैं लेकिन लगता है कि जिंदा नहीं हैं।




आनंद बताते हैं कि 7 मार्च को मेरा बेटा अपने घर से गुडगांव कॉलेज जाने के लिए निकला। टोल देने के बाद मेरा बेटा दिल्ली गुडगांव एक्सप्रेसवे से हो कर अपने कॉलेज जा रहा था। एक टैंकर पानी देने के लिए सड़क के बीचों-बीच खड़ा हुआ था। बीच सड़क में चलते एक पैदल यात्री को बचाने की वजह से उसकी गाड़ी एक ट्रक से भिड़ गई जो कि पौधों को पानी दे रहा था। इसी जगह पर अपनी गाड़ी में वो लहुलुहान पड़ा रहा और किसी भी कंपनी के कोई एंबुलेंस कोई गाड़ी या कोई इनका सिक्यूरिटी गार्ड वहां पर उसको बचाने के लिए नहीं आया। सारी पब्लिक वहां पर थी एक एक्स आर्मी मैन ने उस बच्चे को गाड़ी से निकाला और पास के प्राइवेट अस्पताल में ले के गए। जहां वो एक घंटे तक वो मौत से झूझता रहा और जब उसको बड़े अस्पताल में भर्ती किया गया और वहां पर उसका 5:30 बजे देहांत हो गया।

आनंद का कहना है कि मेरे बेटे की मौत ने बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए हैं और मैं तब तक चैन से नहीं बैठूंगा जब तक मुझे इनके जवाब न मिल जाएं। जिस एक्सप्रेस हाईवे पर 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने की इजाज़त है उस हाईवे पर पैदल चलने की इजाज़त कैसे है? किसके आर्डर से। कैसे एक ट्रक को भरी दोपहर के 2:30 बजे पौधों को पानी देने की इजाज़त दे रखी है जब की ये काम रात को भी हो सकता है। हर 300 मीटर के बाद एक एंबुलेंस यहां पर मुहैय्या करनी होगी और 10 मिनट के बाद अगर कोई एक्सीडेंट होता है तो एंबुलेंस पहुंचनी चाहिए। जबकि आधे घंटे तक कोई एंबुलेंस मेरे बच्चे को बचाने के लिए नहीं आई।

अपने बेटे की मौत के तीसरे दिन आनंद ने वहां हो रहे नियमों की अनदेखी को लेकर तस्वीरें और विडियो बनाया। वो ये देखकर हैरान हो गए कि फुटओवर ब्रिज अभी भी बन रहे हैं और पैदल यात्रियों को सड़क पार रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं। आनंद ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और जीएससी लिमिटेड के खिलाफ पंजाब हरयाना हाई कोर्ट में एक जनयाचिका दायर की।

सबूत के तौर पर उन्होंने कोर्ट में विडियो और तस्वीरें पेश की। हाई कोर्ट ने मामले में नामजद सभी पार्टियों को सम्मन जारी किया और 20 जुलाई की सुनवायी रखी गई है।

DSC के अलावा इन हादसों को लेकर नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑप इंडिया की क्या जिम्मेदारी है ये जानने के लिए आनंद ने एक RTI भी दाखिल की है।

सिटीजन जर्नलिस्ट की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें।


IBNKhabarMore on: CJ, Anand, Delhi



पिछली खबर
भक्षक बना रक्षक, रंग लाई एक शिकारी की मेहनत
अगली खबर
किलर हाइवे पर हादसे के लिए सरकार जिम्मेदार

IBN7IBN7
IBNLiveIBNLive
IBNLive IBNLive

कमेंट्स

0

  
अपना कमेंट भेजें

नाम *

 

सिटी *

ईमेल *

     

कमेंट्स *


IBN7IBN7
IBN7

सिटिज़न जर्नलिस्ट में ये भी

दिल्ली वालों को राह दिखा रहा है ’लेटस् डू इट डेहली’

इसमें कोई शक नहीं कि साफ-सफाई के इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से दिल्ली बहुत पीछे है। 19:38 PM, Aug 30, 2010

लोगों को डेंगू से बचाने में जुटे हैं शोएब

दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली हमेशा ही डेंगू की चपेट में रहती है। जामिया नगर का हाल तो बेहद खराब है। 19:36 PM, Aug 30, 2010

नालों पर सड़कें बनेंगी तो गड्ढे तो होंगे ही!

दिल्ली को इंटरनेशनल सिटी बनाना तो दूर, सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी ही पूरी नहीं कर पाई है। 19:35 PM, Aug 30, 2010

बरसात में ‘बारिश विहार’ बन जाता है बसंत विहार

रंजीत खोसला दिल्ली के बसंत विहार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि थोड़ी सी बारिश के बाद ही ये पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। 15:54 PM, Aug 30, 2010

मासूम रश्मि की तस्वीरें बिखेर रही हैं रोशनी

देश में रोजाना तकरीबन 7 हजार कन्या भ्रूण हत्याएं होती हैं। 19:04 PM, Aug 25, 2010

कल तक सन्नाटा था, आज वहां किलकारियां हैं

देश में एक साल में लगभग डेढ़ करोड़ लड़कियों की भ्रूण हत्याएं की जाती हैं। 19:01 PM, Aug 25, 2010

तारा के जज्बे से हारी भीलवाड़ा की रूढ़ीवादी सोच

डॉक्टरों के खिलाफ आवाज़ उठाई हैं सिटिजन जर्नलिस्ट तारा आहलुवालिया ने। 18:57 PM, Aug 25, 2010

बेटियों को बचाने के लिए पति से भिड़ गई वो!

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ बना कानून आज भी सिर्फ वक्तव्यों और भाषणों में ही सुनाई देता है। 18:36 PM, Aug 25, 2010

आरटीआई ने दिलाया बाढ़ से उजड़ा आशियाना

बिहार में मधुबनी के मजलूम नदफ के रूप में खुद के हक की लड़ाई का बड़ा उदाहरण देखने को मिला। 18:12 PM, Aug 18, 2010

सरकारी हैंडपंप की मांगी जानकारी, मिली जेल

दूसरों के हक़ के लिए लड़ने वाले शिव कुमार को 29 दिनों तक जेल में भी बंद किया गया लेकिन आखिरकार जीत सच्चाई की ही हुई। 18:07 PM, Aug 18, 2010
IBN7
IBN7IBN7
IBN7IBN7