ग़ुस्सा इतना बेक़ाबू कि किसी की जान ले ले। ऐसे ग़ुस्से की वजह बेहद मामूली। सड़क हॉर्न बजाने पर भी आगे वाली गाड़ी नहीं बढ़ी तो गुस्सा, गाड़ी में ज़रा सी खरोंच लग गई तो ग़ुस्सा, साइड मांगने पर जगह नहीं मिली तो ग़ुस्सा। और इसका अंजाम, मार-पीट, ख़ून-ख़राबा। आए दिन ये ग़ुस्सा सड़कों पर खून बिखेर रहा है। लेकिन एक शख़्स इस ग़ुस्से के खिलाफ़ मुहिम चला रहा है।
विपिन सूरी भी कभी सड़कों पर ग़ुस्से में होने वाले हादसों का एक हिस्सा थे। उन्हें भी बहुत गुस्सा आता था और लोगों से लड़ पड़ते थे। और जब विपिन ने इन सड़कों पर कुछ अपनों को खोया तब उन्हें अहसास हुआ कि अब तक उन्होंने अपने ग़ुस्से में क्या क्या किया। फिर वो इस सवाल का जवाब ढूंढने निकले कि क्यों लोग सड़को पर लड़ते है? क्यों इतनी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं क्यों इतनी जिंदगियां बेमौत मर रही हैं कोई बेवजह के ग़ुस्से के खिलाफ़ कुछ करता क्यों नहीं।
इस बारे में जब विपिन ने अपने घरवालों से बात की तो उन्हें भी बड़ी खुशी हुई। वो भी उनके इस काम में उनके साथ हो लिए। सबसे पहले जरूरी ये था कि लोगों को इस समस्या के बारे में समझाया जाए। अपनी मुहिम की शुरूआत विपिन ने डोमेस्टिक एयरपोर्ट पर वहां के ड्राइवर्स के साथ की। उन्हें उनसे बहुत अच्छा रिस्पोंस मिला।
फिर विपिन ने और संस्थाओं में जाकर लोगों को जागरूक करना शुरु किया। वो चाहता था कि उनकी मुहिम लोगों के दिमाग़ में जगह बना ले इसके लिए उन्हें एकनारा सूझा जिसके स्टीकर बनवाया। विपिन का नारा है रोड पे राही भाई भाई। ये स्टीकर लोगों को उनकी गाड़ियों पर लगाने के लिए बांटे।
ये एक कोशिश है सड़क पर चलती हर गाड़ी को एक डोर में बांधने की। इस सोच से जोड़ने की कि विपिन एक दूसरे के लिए अन्जान नहीं बल्कि एक सफर के हमराही हैं। इसके साथ ही इन लोगों ने एक एसएमएस सेवा भी रखी है जिसके जरिए लोग इन्हें एसएमएस भेज कर स्टीकर मंगा सकते हैं।
विपिन की इस मुहिम में धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और आज उनके साथियों की संख्या तकरीबन 150 हो गई है। ये अलग-अलग दफ्तरों स्कूलों और संस्थाओ में जाकर लोगों और बच्चों को इस मुहिम के बारे में बताते हैं।
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