भोपाल/बुंदेलखंड। पूरे मध्य प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार है। कहीं पानी के लिए कत्ल हो रहा है तो कहीं खून के बदले पानी मिल रहा है। लेकिन इसके बावजूद सरकार विकास के वायदे कर रही है। बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही जनता को सरकार का ये विकास समझ नहीं आ रहा है। और यही हालत उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में हैं। खेती के लिए तो दूर आम लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
दरअसल मध्य प्रदेश के धार जिले में पानी की कमी से हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों को पानी खरीदने के एवज में अपना खून देना पड़ रहा है। कुछ समय पहले भोपाल में पानी के लिए एक परिवार के तीन लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
भोपाल में पानी का इतना बुरा हाल है कि यहां के बदमाशों ने पानी भरवाने के लिए अपने अपने इलाके तय कर लिए हैं। उनकी मर्जी के बगैर किसी को पानी नहीं मिलता। अब लोगों को उम्मीद भगवान के साथ-साथ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से है कि वो इस बार के बजट में सूबे का खास ख्याल रखेंगे।
बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे मध्य प्रदेश में अब पानी की राशनिंग भी शुरू होने वाली है। यानी पानी के लिए तरस रहे मध्य प्रदेश के लोगों को राशन कार्ड की तरह वाटर कार्ड से पानी लेना होगा। भोपाल के पास शिहोर नगर में तो बकायदा पानी के कार्ड भी बन गए हैं। नगर पालिका एक आदमी को एक दिन में 50 लीटर पानी देगी।
किसी परिवार में अगर 4 सदस्य हैं तो उसे रोजाना 200 लीटर पानी से काम चलाना होगा। अगर ज्यादा जरूरत है तो अगले दिन का इंतजार करना होगा।
इसके अलावा मालूम हो कि IBN 7 ने कुछ दिनों पहले जब बुंदेलखंड की भूख दिखाई थी तो प्रशासन से लेकर सरकार तक हड़कंप मच गया था। यहां के किसान दिन रात परेशानियां झेल रहे हैं। बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर के तमाम इलाके आज प्यास से बेहाल हैं।
यही नहीं सरकारी महकमा लोगों की दिक्कतों से अच्छी तरह से वाकिफ है। उन्हें पता है कि क़तरा-क़तरा पानी की आस में गांव वालों के ये रुखे चेहरे शायद उन्हें भी सोते वक्त परेशान करते हों। कहते हैं एक दिन सब ठीक हो जाएगा। लेकिन माया सरकार में वो दिन कब आएगी। इस खबर पर आप राय दें।
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