नई दिल्ली। देश पर कुल विदेशी ऋण दिसम्बर 2008 तक 230.8 अरब अमेरिकी डॉलर जबकि विदेशी मुद्रा भंडार मार्च 2009 तक 252 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
संसद में पेश वर्ष 2008-09 की आर्थिक समीक्षा में यह जानकारी दी गई। इसके अनुसार मार्च 2008 तक देश पर कुल 224.77 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण था जो कि दिसम्बर 2008 तक 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर और बढ़कर 230.8 अरब अमेरिकी डॉलर यानी 11 लाख 18 हजार 565 करोड़ रूपए तक पहुंच गया। इस ऋण में दीर्घावधिक ऋण कुल विदेशी ऋण का 79.4 प्रतिशत तथा अल्पावधिक ऋण 20.6 प्रतिशत था।
समीक्षा के अनुसार मार्च 2009 तक 252 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि विदेशी मुद्रा प्रारक्षित भंडार में थी। मई 2008 के अंत में यह आंकड़ा 314.6 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर था जो नवम्बर 2008 तक 247.7 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया था।
गौरतलब है कि विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, एसडीआर और आईएमएफ में प्रारक्षित ट्रांस स्थिति शामिल है।
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