नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने हथकरघा सहकारी समितियों की मदद के लिए 3000 करोड़ रुपए का एक वित्तीय पैकेज तैयार किया है।
वस्त्र राज्यमंत्री पानाबाका लक्ष्मी ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि इस पैकेज को वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया गया है। इसके तहत हथकरघा सहकारी समितियों के बकाया कर्जों की माफी और उन्हें सात प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
लक्ष्मी ने बताया कि मिलों से प्रतिद्वंद्विता, ऋण की अनुपलब्धता और बाजार में प्रतिकूल स्थितियों को कारण असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उड़ीसा में कुछ हथकरघा इकाइयों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।
1995-96 के एक सर्वेक्षण के अनुसार देश में 65 लाख 51 हजार से अधिक लोग हथकरघा क्षेत्र से जुड़े हैं। असम में 23 लाख, उत्तर प्रदेश में 4 लाख, उड़ीसा में 2 लाख, राजस्थान में 71 हजार और महाराष्ट्र में 80 हजार से अधिक लोग हथकरघा क्षेत्र में लगे हैं।
लक्ष्मी ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में लगे लोगों की स्थिति धागे, कर्ज, करघा और उसके पुर्जों की वाजिब कीमतों और सतत सप्लाई पर निर्भर करती है। मौजूदा समय में उन्हें मिलों और पावरलूम से कड़ी प्रतिद्वंद्विता और तैयार माल के विपणन से संबंधित दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि हथकरघा क्षेत्र में लगे लोगों की मदद के लिए सरकार ने एकीकृत हथकरघा विकास योजना, विपणन तथा निर्यात संवर्द्धन योजना, हथकरघा बुनकर व्यापक कल्याण योजना, मिल गेट कीमत योजना और विविधिकृत हथकरघा विकास योजना जैसी कई योजनाएं चलाई हैं।
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