नई दिल्ली।रेल मंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को वर्ष 2009-10 का रेल बजट पेश किया। बतौर रेल मंत्री ममता ने आज तीसरी बार रेल बजट पेश किया। इससे पहले एनडीए सरकार में उन्होंने दो बार रेल बजट पेश किया था।
संसद में अपने बजट भाषण में ममता ने कहा कि पैसेंजरों की सुविधा का खयाल मेरी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रेल बजट में 50 स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास स्टेशन का दर्जा दिया जाएगा। इनमें सीएसटी मुंबई, पुणे, नागपुर, हावड़ा, नई दिल्ली, वाराणसी, चैन्नै, लखनऊ आदि स्टेशन शामिल हैं।
इसके अलावा रेल मंत्री मामता बमर्जी ने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर मल्टी फंक्शनल कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे, जिसमें यात्रियों के लिए तमाम इंतजाम होंगे। विकलागों और बुजुर्गों क लिए स्पेशन कोच की व्यवस्था का भी बजट में ऐलान किया गया है।
साथ ही उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर बहुउद्देश्यीय परिसर बनेगा जिनमें होटल और व्यावसायिक केन्द्र होंगे औऱ लम्बी दूरी की रेलगाड़ी में कम से कम एक डाक्टर तैनात किया जाएगा।
रेल बजट को सत्तारुढ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के नेताओं ने समाज के सभी वर्गो के हितों का रखवाला बताया है जबकि विपक्ष ने इसे महज वायदों का पिटारा करार दिया।
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि इस रेल बजट में वायदे तो खूब किए गए हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि ये वायदे पूरे होते है या नहीं। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने कई वायदे किए हैं जिनमें 100 दिनों के भीतर आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के दामों पर नियंत्रण पाना भी शामिल था। लेकिन वास्तविकता यह है कि आज सभी वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
इस साल के अंत तक मोबाईल पर एसएमएस से आरक्षण स्थिति पता लगने की व्यवस्था शुरू करने की बात कही। अपने भाषण में कहा कि हर सांसद के सुझाव पर एक नया आरक्षण केन्द्र बनेगा। इसके अलावा ममता ने कहा कि पांच हजार डाकघरों से कम्प्यूटरीकृत रेल टिकट की सुविधा की व्यवस्था की जाएगी।
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हालांकि उनके हाव-भाव से भी पता लग चुका था कि वो किसी भी तबके की नाराजगी नहीं चाहती। वैसे तो दीदी ने रेल बजट में सभी का ख्याल ऱखा।
ममता ने इसे गरीबों और आम आदमी का बजट बनाने की कोशिश की है। इसके लिए लालू की तरह ही यात्री किराया न बढ़ाने पर फोकस किया है, साथ ही वो तत्काल टिकट को भी तर्क संगत बनाने की जुगत में हैं।
यानि अब 5 दिन की बजाए सिर्फ एक दिन पहले ये टिकट मिलेगा और जितनी दूरी तक आप सफर करेंगे उतना ही किराया देना होगा। जबकि अभी तक ट्रेन की रवानगी स्टेशन से आखिरी स्टेशन तक का किराया देना पड़ता था।
इसके अलावा बनर्जी यदि बिना किराया बढ़ाए छात्रों और बुजुर्गो को रियायती पास उपलब्ध कराने और अन्य सुविधाओं को भी ध्यान में रखा।
इसके अलावा बजट में जहां खाने की क्वालिटी में सुधार करने पर जोर दिया, वहीं रेलवे स्टेशनों पर गरीब आदमी के खाने के लिए कम कीमत पर भोजन को भी नहीं भूलीं। लोगों को आसानी से रिजर्वेशन टिकट मिल जाए इसके लिए काउंटर भी बढ़ाने की बात कही गई।
वैसे ममता को पता को पता था कि लोग उनके बजट की तुलना पूर्व रेल मंत्री लालू यादव के बजट से करेंगे। इसलिए दीदी ने बजट को अंतिम रूप देने में काफी सावधानी बरतीं।
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