एक जून को एयर फ्रांस की फ्लाइट AF 447 जोकि रियो डी जनेरियो से पैरिस जा रही थी अटलांटिक ओशन में गिर गई थी। इस प्लेन में सवार 228 यात्रियों को दुर्घटना के समय अपनी सीट बेल्ट तक लगाने का मौका नहीं मिला था।
जांचकर्ताओं के मुताबिक ये एयरबस 35,000 फीट गहरे पानी में जा गिरी। ये जानकारी फ्रेंच कैपिटल के एक अधिकारी ने दी।
मालूम हो कि उस एयरबस में सवार सभी 228 यात्रियों की मौत हो गई। किसी के पास इतना समय ही नहीं था कि वो अपनी सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट तक लगा सकें। सूत्रों के मुताबिक प्लेन हवा में नहीं टूटा था।
ऐलेन बॉयलार्ड हादसे के चीफ इंवेस्टीगेटर ने बताया कि प्लेन हवा में नहीं टूटा था बल्कि पानी में गिरने के बाद उसके कई टुकड़े हुए थे।
उन्होंने बताया कि हादसे के फौरन बाद अटलांटिक ओशन में बंद लाइफ जैकेट बिखरे हुए पाए गए।
एयरबस A330-200 930 माइल नीचे चला गया और कवरेज एरिया से भी बाहर हो गया था। ऐलेन बॉयलार्ड ने बताया कि प्लेन के खराब एयरस्पीड सेन्सर एक फैक्टर थे लेकिन क्रैश का कारण नहीं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्लेन के सभी बाहरी यंत्र पर बर्फ जम गई होगी। इसलिए एयरफ्रांस ने अपने मॉनिटर बदल दिए हैं।
हालांकि ऑटोमेटेड मैसेज से बचाव दल को ये तो पता चल गया कि प्लेन कहां पर जाकर गिरा लेकिन उसका ब्लैक बॉक्स अब भी नहीं मिल सका है।
फ्रेंच एयर हादसे के जांचकार्ता एजेंसी BEA ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट को अपने हेडक्वार्टर जोकि पैरिस के बाहरी हिस्से में है को सौंप दी है।
हादसों के शिकार हुए लोगों के रिशअतेदारों ने BEA और एयरफ्रांस के अधिकारियों से मुलाकात की।
विक्टिम एसोसिएशन के हेड गुलियट के मुताबिक परिवारों को सच्चाई का पता चल जाएगा और उन्हें उम्मीद दिलाई जाएगी कि दोबारा ऐसे हादसे न हों।
गुलियट ने कहा कि हमें सिर्फ पारदर्शिता चाहिए। हमारी बस एक ही मांग है सच्चाई।
51 यात्रियों के अवशेष अब भी खोजे जा रहे हैं।
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