गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में मानसून की लुकाछिपी ने पूर्वांचल विशेषकर गोरखपुर मंडल में धान की अच्छी फसल पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
पूर्वांचल में मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ने से किसान मायूस हो गए हैं। मानसून की पिछले एक सप्ताह पूर्व हुई बारिश के दौरान जिन किसानों ने अपने धान की रोपाई कर दी थी अब वे दुबारा आसमान की तरफ देखकर मायूस हो गए हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बस्ती मंडल के महराजगंज व सिद्धार्थनगर जिले को छोड़कर अन्य किसी भी स्थान पर पिछले 48 घंटे के दौरान एक बूंद भी पानी नहीं बरसा। आज दिनभर खिली धूप ने रही सही कसर पूरी कर दी। शहरी जीवन भी एक बार फिर उमस भरी गर्मी से बेहाल हो गया है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दोनों मंडलों के सात जिलों में धान की लगभग 20 प्रतिशत नर्सरी पहले ही धूप में झुलस चुकी है और अगर फिर पानी नहीं बरसा तो रोपे गए धान को बचा पाना भी मुश्किल होगा।
मालूम हो कि प्रदेश का यह क्षेत्र धान की अच्छी पसल के लिये जाना जाता है। इस बीच गोरखपुर के कृषि संयुक्त निदेशक उमाकान्त का कहना है कि मंडल में धान की फसल का कोई विशेष नुकसान नहीं हुआ है और किसानों को समय पर खाद-पानी और बीज मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन किसानो की स्थिति और मायूसी कुछ अलग हकीकत बयान करती है।
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