IBN7 की खास पेशकश मुद्दा में इस बार समलैंगिकता पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले पर चर्चा हुई। समलैंगिक जिन्हें एक अजीबोगरीब निगाह से देखा जाता था। समाज में हाशिए पर रखा जाता था। धारा 377 थी जिसके तहत अगर एक मर्द मर्द से शारीरिक संबंध बनाता है या एक औरत-औरत जिस्मानी रिश्ते बनाती है तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा थी या फिर 10 साल की सजा और जुर्माना भी।
लेकिन अब दिल्ली हाई कोर्ट ने संमलैगिकता को मान्यता दे दी है। इसे समाज का एक तबका आजादी का इजहार मान रहा। एक ऐतिहासिक फैसला मान रहा है। लेकिन एक बड़ा तबका भी है जो आज भी संमलैगिकता को मानसिक विकृती मानता है। कुंठा मानता है। धर्म संस्कृति के खिलाफ मानता है।
इस पर चर्चा के लिए मौजूद थे बाबा रामदेव (योग गुरु), अशोक राव कवि (गे एक्टिविस्ट), निशा जगवाल( फैशन डिजाइनर), सुरेंद्र जैन( वीएचपी नेता), खलीलुर रहमान(सदस्य उलेमा काउंसिल), नितिन करानी(गे एक्टिविस्ट)। चर्चा का संचालन किया संदीप चौधरी ने।
बहस के दौरान बाबा रामदेव ने समलैंगिकता का जमकर विरोध किया। उनका कहना था कि इस समाज में चोर भी हैं और कई विकृतियों से युक्त लोग भी हैं तो क्या सबको कानूनी मान्यता दे देनी चाहिए। उनका कहना था कि ऐसा करने से हम अपने समाज के लिए अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर गे एक्टिविस्ट अशोक राव की नजर में रामदेव का यह तर्क बेमानी है। संविधान ने सबको जीने का अधिकार दिया है। कुछ धर्म के ठेकेदार ही बस समलैंगिकता का विरोध कर रहे हैं।
दूसरी ओर खलीलुर रहमान ने कहा कि इस्लाम में ऐसी सोच कतई स्वीकार्य नहीं है। इसका जितना विरोध किया जाए कम है। उधर, निशा जगवाल ने कहा कि समलैंगिकता को लेकर काफी भ्रांतिया हैं। उनका कहना था कि यह प्राकृतिक है। इसमें कुछ भी अजीब नहीं है। समाज को इसे स्वीकारना चाहिए।
(<‘मुद्दा’ में समलैंगिकता पर हुई पूरी चर्चा देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें)












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