अहमदाबाद। अहमदाबाद में गुरु पूर्णिमा के मौके पर आसाराम बापू ने पत्रकारों की तुलना ब्लैकमेल करने वाले भौंकते कुत्तों से की। न शब्दों में लिहाज, न संयम, न प्रेम और न शांति का संदेश, आज बापू का गुस्सा देखने लायक था। उन्हें ये बात नागवार गुजर गई कि आखिर मीडिया ने उनके आश्रम में काले जादू की खबरें दिखाईं कैसे। वो ये भूल गए कि काले जादू की खबर खुद कोर्ट में दाखिल गुजरात सरकार के हलफनामे से निकली है।
आसाराम बापू अपने हजारों भक्तों के सामने खुलेआम चैनल वालों को फांसी पर चढ़ाने की वकालत तक कर गए। बापू की जुबान पर ऐसी चिढ़ उतरी कि मीडिया को पानी पी पी कर कोसते रहे। कह गए कि मीडिया तो ब्लैकमेल करता है लेकिन बापू इन ब्लैकमेलरों के चक्कर में नहीं आने वाला।
आसाराम बापू इस खुलासे पर भड़के हुए हैं कि उनके आश्रम में काला जादू किया जाता है। वो शायद भूल गए कि ये खुलासा मीडिया ने नहीं बल्कि खुद गुजरात की मोदी सरकार ने किया है। मोदी सरकार ने ही कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है, उसमें आश्रम के ही दो कर्मियों के लाइ डिटेक्टर टेस्ट की रिपोर्ट का हवाला है। साफ लिखा है कि - आश्रम में काला जादू होता है। मोदी सरकार पर तो बापू कृपा कर गए लेकिन अपने तेज से भस्म करने के अंदाज में टीवी चैनलों को मानो सूली पर चढ़ा गए।
बापू ने यहां तक कहा कि उनका नाम सिर्फ इसलिए काले जादू में घसीटा जा रहा है क्योंकि उन्होंने कई पत्रकारों को पैसा नहीं दिया। बापू के आश्रम में काम करने वाले दो लोगों ने जांच एजेंसियों की मौजूदगी में झूठ पकड़ने वाली मशीन के सामने ये कबूला है कि आश्रम में काला जादू होता है। इस बयान ने आश्रम की साख पर बट्टा लगा दिया -सो बापू आग बबूला हो उठे।
अपने भक्तों के सामने विषवाणी में रमे बापू ने साफ कहा कि काले जादू की रट तो वही लगा सकता है जिसके दिल में खुद कालिख हो। आसाराम बापू का आश्रम संगीन आरोपों के घेरे में है। पिछले साल इस आश्रम के गुरुकुल में पढ़ने वाले दो बच्चों की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी। एक की लाश बाथरूम में पाई गई थी तो दूसरे की आश्रम के बाहर।
क्या खुद को संत बताने वाले किसी व्यक्ति का इस तरह के अपशब्द इस्तेमाल करना उचित है? राय दें।
(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)








कमेंट्स
0