रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में नक्सली हमले में शहीद हुए पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे नक्सलियों से पहले भी कई बार मोर्चा ले चुके थे और उन्हें गोली भी लग चुकी थी।
राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में प्रोन्नत चौबे 2003 में राज्य के एक समय के नक्सली प्रभावित पुलिस जिला बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ हुए और उन्होंने जांबाजी से नक्सलियों का सफाया करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इस दौरान वह जंगली इलाकों में पुलिस जवानों का मनोबल बढ़ाने पहुंचे और इस बीच मुठभेड़ में उनके पैर में गोली भी लगी। इसके बाद उनकी राजधानी में पुलिस अधीक्षक नगर के पद पर पदस्थापना हुई।
चौबे इसके बाद 2006 में फिर नक्सल प्रभावित जिले सरगुजा के पुलिस अधीक्षक बनाये गए। यहां से उनका स्थानान्तरण राज्य के घुर नक्सली जिले कांकेर में हुआ। इस दौरान कई मुठभेड़ों में उन्होंने हिस्सा लिया और दो तीन बार वह बाल-बाल बचे। चौबे की पदस्थापना डेढ़ साल पहले राजनांदगांव जिलें में हुई।
राजनांदगांव में पदस्थापना के बाद भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने जांबाजी से दौरे किए और जवानों की हौसलाआफजाई करने के लिये खतरनाक इलाकों में जाने से गुरेज नहीं किया। उनकी यह जांबाजी ही उनकी शहादत का कारण बनी।
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