नई दिल्ली। मुंबई पर 26 नवंबर को हुए हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर बर्फ जम गई थी। लेकिन अब वह बर्फ पिघलती दिख रही है। गुरुवार को मिस्र में प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बाद साथ साझा बयान जारी किया। उस बयान का लब्बोलुवाब ये की सम्रग बातचीत (कॉम्पोजिट डॉयलग) जारी रहेगी वो शुरू किया जाएगा। साथ ही साथ आतंकवाद पर लगाम लगाने की जो मुहिम है उसमे तेजी लाई जाएगी, लेकिन दोनों को साथ जोड़कर नहीं देखा जाएगा।
कुछ लोगों का मानना ये है कि क्या पाकिस्तान एक और आतंकी हमला अंजाम देता है भारत पर और क्या बातचीत जारी रहेगी। इसको लेकर संसद में अच्छा खासा बवाल हो गया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने लोकसभा में पहला वॉकआउट कर दिया है।
ऐसे में सवाल ये है कि क्या ये भारत की एक सोची समझी रणनीति है, कूटनीति है। या फिर कोई दबाव काम कर रहा है भारत पर। क्या हिन्दुस्तान झुक गया है। या फिर प्रधानमंत्री ने एक जुआ खेला है। कोई भी बड़ी पहल करने के लिए जुआ खेलना पड़ता है। क्या ये जुआ खएला है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने।
इसी पर IBN7 के खास प्रोग्राम ‘मुद्दा’ में चर्चा हुई। इस पर चर्चा के लिए मौजूद थे विनोद शर्मा ( राजनीतिक संपादक एच टी), मुरली मनोहर जोशी(नेता बीजेपी), केसी सिंह (पूर्व सचिव विदेश मंत्रालय) ब्रह्म चेलानी (रक्षा विशेषज्ञ), ए के डोवाल ( पूर्व आईबी प्रमुख), दिग्विजय सिंह (पूर्व विदेश राज्य मंत्री)
संदीप-पाक की बात करने की जरूरत क्यों है जब वो बदलता नहीं है?
विनोद शर्मा संसद पर हमला हुआ तब हमने कहा था कि हम बातचीत नहीं करेंगे लेकिन वाजपेयी ने बात शुरू की। मैं समझता हूं कि भारत जैसे मैच्योर मुल्क के लिए- नो टॉक कैन नोट बी ए पॉलिसी। ये सच है कि वहां कई लोग भारत के खिलाफ हैं लेकिन जो ऐसे लोगों के खिलाफ है उन्हें आगे बढ़ाने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
संदीप- क्या हमारे लिए यह समझौता घाटे का सौदा रहा?
मुरली मनोहर जोशी हमें ऐसा रुख अपनाना चाहिए था कि आगे से वो ऐसा नहीं करेगा। अमेरिका, इंग्लैंड में एक बार हमला हुआ लेकिन फिर नहीं हुआ। भारत में बार-बार हो रहा है। भारत को शर्त रखनी चाहिए कि जबतक वो आतंकी हमले नहीं रोकेगा तब तक कोई बात नहीं होगी। पर हुआ उल्टा। मैं समझता हूं कि जो समझौता हुआ है उसमें भारत ने अपनी कमजोरी दिखाई है।
संदीप- क्या पाक का रवैया बदला जिसके आधार पर हम बातचीत को तैयार हो गए?
केसी सिंह- पूर्व विदेश सचिव- दोनों पीएम अलग-अलग तरह की एक्सप्लेनेशन दे रहे हैं। यह कुछ पैच वर्क हैं। शुरू में भारत यह कह रहा है कि आप ठोस कार्रवाई करें। पाक चाहता था कि भारत हमारे साथ बात करे। पाक को कश्मीर, सियाचिन के आलावा किसी और मुद्दे में दिलचस्पी नहीं है।
संदीप- ऐसे में क्या भारत-पाक के बीच बातचीत का एजेंडा मुश्किल बन गया?
चेलानी- बात तो पहले से हो रही है। बलूचिस्तान का मुद्दा इसमें आ गया है। भारत ने पाक के साथ पहले बातचीत की शर्त रखी थी लेकिन वो कहां गई।
संदीप- सईद के खिलाफ पाक में पंजाब सरकार कोर्ट में जाने के तैयार नहीं, वहां से आंतकी भारत के खिलाफ साजिश लगातार कर रहे हैं। ऐसे में बातचीत का क्या मतलब है?
ए के डोवाल- पाक में कुछ नहीं हुआ है। कोई ऐसे कार्रवाई नहीं हुई जिससे हम कहें कि कुछ हुआ। चाहे कैंप बंद करने की बात हो, चाहे घुसपैठ की बात हो या फिर भारत के खिलाफ खास हथियारों की बात हो। यह रणनीति का हिस्सा है। पाक की रणनीति ये है कि हिंदुस्तान को फोर्स करके कश्मीर पर हिस्से में लाना है। पहला तरीका हमला, दूसरा बातचीत के जरिए। वार्ता से कुछ नहीं निकलने वाला। पाक वार्ता के बहाने पूरी दुनिया को दिखाना चाहता है कि देखो हम इस मसले पर गंभीर हैं।
संदीप- क्या हम पाकिस्तान का रणनीति का हिस्सा बन गए क्या?
दिग्विजय सिंह- जो कुछ हुआ है उसे लेकर मैं दुविधा में हूं। दूसरी तरह पाक ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे यह पक्का हो पाक ने कुछ किया। भारत ने बलूचिस्तान को मुद्दा बनाकर ये क्या कर लिया!
संदीप-बलूचिस्तान को भी इसमें जोड़ दिया गया है?
मुरली मनोहर जोशी- यह चाल है जिसमें हमारे पीएम फंस गए। यह पाकिस्तान की चाल है। इसके अलावा भी गिलानी साहब का ये बयान है जिससे उन्होंने कहा कि भारत बलुचिस्तान में सक्रिक है। इस बात की पुष्टि करता है।
संदीप-क्या हकीकत में भारत झुक गया?
विनोद शर्मा- जरदारी जब आतंक की बात स्वीकारते हैं तो हम चुप रहते हैं। पीएम ने ऐसा इसलिए कहा कि टेररिज्म पर बात चलती रहे। जोइंट स्टेटमेंट में कोई ऐसी बात नहीं है कि हम कंपोजिट डॉयलाग शुरू कर रहे हैं।
संदीप-क्या हम पूरे मसले को गलत समझ रहे हैं?
चेलानी- पीएम चुप हैं बलूचिस्तान क्यों आया है? पहली बार भारत ने माना कि इस्लामिक रिपबलिक ऑफ पाकिस्तान। ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने की क्या जरूरत थी।
संदीप- क्या हमने गलतियां की हैं?
ए के डोवाल- दो गलतियां की हैं। बलूचिस्तान पर, दूसरा मुंबई का नाम तक नहीं हैं।
संदीप-क्या अब आतंकवाद पर बात नहीं हो पाएगी?
मुरली मनोहर जोशी- अब आप जो बात करेंगे कि वो आतंकवाद पर तो नहीं करेंगे। क्योंकि वो एजेंडे में ही नहीं है।
संदीप- कहीं दबाव तो काम नहीं कर रहा?
सिंह- बार-बार आप वार्ता की कोशिश। लेकिन गलत हो गया। ऐसा डॉक्यूमेंट में नहीं होना नहीं चाहिए।
संदीप- क्या दबाव काम कर रहा था?
मुरली मनोहर जोशी- इस मामले में दबाव का भी एक हिस्सा है। आते ही अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन पीएम की तारीफ क्यों कर रही हैं। यह उनकी इंटरनेशनल डिप्लोमेसी का एक और नमूना है। पीएम या उनके अफसर किसी न किसी मामले में दबाव में आए हैं।
संदीप- क्या हमें बात करनी पड़ेगी?
ए के डोवाल-एक महीने में हम बड़े हो गए क्या। इन 28 दिनों में क्या बदला। हाफिज को छोड़ा, धुसपैठ बढ़ी। क्या इसके कारण भारत ने सोचा कि बलूचिस्तान को मुद्दे में डाल दिया जाए। ये ठीक है पीएम पर हमें पूरा भरोसा है। हम पाक पर उसी बात का दबाव डाल सकते हैं।
संदीप-क्या हम गलती कर रहे हैं?
चेलानी-मुख्य लाभ पाने वाला अमेरिका है। अमेरिका चाह रहा था कि भारत पाक की चिंताओं को समझे।
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