IBN7 की खास पेशकश ‘मुद्दा’ में इस बार चर्चा की गई मायनगरी मुंबई में हुए एक वाकये की। जाने-माने फिल्म अभिनेता इमरान हाशमी को अपने सपनों का घर नहीं मिल पा रहा है मायनगरी मुंबई में। जब एक ऐसे शख्स के साथ ऐसी दास्तान हो सकती है तो एक आम आदमी के साथ क्या होता होगा। ये सिलसिला सिर्फ मायानगरी मुंबई तक सीमित नहीं है। ये शहर मुंबई की जगह देश की जगह कोई शहर भी हो सकता था। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि बतौर समाज क्या हम सांमप्रदायिक भी होते जा रहे हैं।
62 साल हो गए हैं आजादी को लगातार हम ये गीत भी गाते हैं कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। लेकिन क्या हमने ये गीत इतना गा लिया है कि अब ये हमारे समाज में बेमानी होता जा रहा है।
इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ‘मुद्दा’ में मौजूद थे इमरान हाशमी (अभिनेता), अनिल धवन( अभिनेता), मधु किश्वर (समाजशास्त्री), तरुण विजय (संपादक पांचजन्य), महेश भट्ट( फिल्म निर्देशक), शबाना आजमी (अभिनेत्री), राशिद अल्वी( नेता कांग्रेस), सरदार तरलोचन सिंह( पूर्व अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग)
इस शो की एंकरिंग की संदीप चौधरी ने।
संदीप आप खुद ही बताइये क्या हुआ?
इमरान पिछले एक महीने से मैं घर की तलाश में था। पाली हिल में कई घर देखे। तभी किसी ने कहा कि फलाने बिल्डिंग में भेदभाव है। मैंने सोचा नहीं। मुझे एक घर पसंद आया सोसायटी में, पेरेंट्स मिलने गए। उन्होंने कहा कि बिजी हैं, बाद में आना। 5 दिन हम आपको एनओसी दे देंगे। वे सीधे नहीं कह पाए कि मैं मुसलमान हूं।
संदीप-आपको अंदाजा था कि ऐसा हो जाएगा?
इमरान- मुझे फ्लैट बेचने वाले थे वे भी पीछे हो गए। वैसे तो मुझे 10 घर मिल जाएंगे। लेकिन मैं बात उठाना चाहता था कि सबको पता चले कि क्या हो रहा है।
संदीप-जो इल्जाम है उसमें कितना दम है?
अनिल- ये निहायत ही झूठ बोल रहा है। उसे इल्म नहीं है। उसने पूरे हिंदुस्तान को हिला दिया है। सोसोयाटी में कोई नहीं आया। एनओसी की बात कैसे की जाती। आप गाड़ी खरीदने जाते हैं तो 3 दिन लग जाते हैं, ये शख्स झूठ बोल रहा है।
संदीप- इमरान की सीरियल किसर की छवि है, आपने ही कहा था?
अनिल- मैंने ऐसा नहीं कहा था। ( अनिल ने शुक्रवार को IBN7 से जो कहा-
ऐसा है कि हमारे बच्चे खराब हो जाएंगे। हम अपने बच्चे को बचाएंगे। मैं खुद लखनऊ का रहने वाला हूं। मैं तो सिर्फ मैंबर हूं।)
संदीप- पहले मुसलमान फिर सीरियल किसर की बात कहना कितना सही है?
मधु- मेरे खयाल से दोनों साइड को ढंग से सुना जाना चाहिए। मुझे मालूम है कि सोसायटियों में ऐसा हो सकता है लेकिन सिंगल वोमेन को तो इससे भी ज्यादा प्रोब्लम होती है। हाशमी ने ही कहा कि वो दस और घर खरीद सकते हैं, सिर्फ एक घर ही तो नहीं मिला। सौ में दो या पांच लोग नहीं चाहते कि उनके बगल में कोई गैर आए। सवाल है कि भड़काइये मत।
तरुण- ऐसे आदमी को कहीं मकान नहीं मिलना चाहिए।
संदीप-हम छुपा रहे हैं?
भट्ट- मुझे लगता है कि हम अंधों के शहर में आइना बेचने निकले हैं। ये शबाना के साथ घटा। ये जीनत के साथ घटा है। चूंकि ये सैलिब्रिटी हैं इसलिए बात उछली। ये हमारे समाज में अजीब से कांट्रिडिक्शन हैं। मुतलब चाहे जो करें। मगर आप कैंसर से मुंह फेर लोगे। इससे कैंसर नहीं रुक जाएगा।
मधु- कश्मीर में कश्मीर नहीं रह पाया।
राशिद- इस देश के अंदर ये मुमकिन है कि हिंदु या मुस्लिम एक दूसरे को मकान न दें। मैं जब 25 साल पहले दिल्ली आया तो मकान ढूंढने के दौरान एक महिला ने कहा कि अगर तू मुसलमान है तो मकान मत देख लेकिन वहीं एक हिंदू ने मुझे घर दिया। इस मुद्दे को मुद्दा न बनाके समाज में बदलाव कैसे आएगा इस पर मेहनत करनी होगी।
संदीप- ये बिन बात का बवाल है?
त्रिलोचन- बात इतनी सी नहीं है। जब सिखों का झगड़ा चला तब ऐसा था। ये कुछ ऐसा है जिसको आप उखाड़ नहीं सकते हैं। आप देखिए मुसलमान कहां रहता है। यह एक भावना बन गई। यह बात साफ है कि मिक्स लिविंग होगी तो कम्यूनल टेंशन कम होगी।
संदीप- ये शुरुआत, सही है?
भट्ट- इमरान हाशमी ने उंगली पूरे समुदाय पर नहीं उठाई। उसकी बीवी हिंदू है। उसकी मां ईसाई है। सच्चर कमिटी की रिपोर्ट एक दिन में नहीं आई है। यह सच है कि मुस्लिम समाज को मुख्य समाज का हिस्सा नहीं बनाया गया है।
मधु-यह सही नहीं है। मेरा परिवार तीन बार कश्मीर से उजड़ा है। इस टोन में नहीं करूंगी कश्मीरी पंडितों की बात।
संदीप-अगर झगड़ा नहीं बढ़ाया जाएगा तो क्या हल निकल आएगा?
तरुण-आमिर, जावेद और शबाना झूठ बोलते हैं। ये सब झूठ बोलते हैं। ये घटिया स्तर पर गए। वे हैडलाइन बनाना चाहते हैं।
संदीप-आप उनपर सस्ती लोकप्रिता की आरोप लगा रहे हैं?
राशिद-मैं तरुण से सहमत नहीं हूं। तरुण तुम्हें जरूर नागवार गुजरे। खतावार वो हैं जिन्होंने धर्म के नाम पर हिंदू-मुसलमान को एक दूसरे को अलग किया। मैंने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया।
तरुण- इमरान हाशमी को लेकर मुद्दा बनाया जा रहा है यह बड़े शर्म की बात है।
संदीप-इंडस्ट्री दो खेमों में बंटी हुई है?
भट्ट- आपके साथ रेप नहीं हुआ तो इसका मतलब यह कि ऐसा होता नहीं है। इमरान ने एक मुद्दा उठाया है। इमरान ने यह बात चिल्ला के कही है कि कई के साथ ऐसा होता है।
तरुण- अभी मामले की जांच हो रही है, अगर इमरान गलत साबित हो गया तो क्या सजा दी जाएगी उसे?
भट्ट- बात हिंदू-मुसलमान की नहीं है। इमरान हाशमी एक कामयाब एक्टर है। वह क्यों करेगा यह सब।
संदीप- क्या घेटोआइजेशन बड़ा खतरा है?
त्रिलोचन-इसका इतिहास है। वही मरे जो अकेले रहते थे। जो इकट्ठे रहते थे वो नहीं मरे। इसलिए यह भावना बढ़ी है।
संदीप- क्या यह होना चाहिए?
राशिद- सिखों के साथ जो जुल्म हुआ उसे पढ़ते हुए पसीना आ जाता है। अगर मुल्क एक रखना है तो हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई को साथ रहना होगा।
संदीप- ऐसा होता है क्या ये कड़वी सचाई नहीं है?
शबाना- किसी भी मसले को हल करने का तरीका है कि उस पर खुलकर बहस हो। ये कहकर कि ऐसा नहीं हाता। ऐसा कहकर आप समस्या का हल नहीं होने देते। यह आमतौर पर हो रहा है। दलितों, अल्पसंख्यकों, अकेली महिलाओं सबके साथ यह होता है। लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि इसी समाज में एक बड़ा वर्ग है जो इन भावना का जमकर विरोध करता है।
मधु- कई साल पहले मेरा परिवार उजड़ कर अलग हुआ। बाद में हालात बदले लेकिन 80 के दशक में जो दंगों की राजनीति चली, फिर आतंक आया। इसलिए घेटोआईजेशन प्रोब्लम हो रही है।
(इस मुद्दे पर पूरा कार्यक्रम देखने के लिए वीडियो देखें)
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