नई दिल्ली। डी-सेगमेंट में पॉपुलर कारों की बात करें तो सबसे पहले तीन कारों का नाम आते हैं। करोला ऑल्टिस, होंडा सिविक और वॉक्सवैगन की जेट्टा। इन तीनों कारों में छिड़ी है एक जबरदस्त जंग। ये कार एक दूसरे को हर लिहाज से टक्कर दे रहीं हैं।
डी सेगमेंट की कारो में सिविक 2006 से धूम मचा रही हैं जबकि दो महीने पहले ही होंडा सिविक को टकर देने के लिए वॉक्सवैगन अपनी जेट्टा को भारतीय सड़कों पर ले कर आई। इसके साथ ही कुछ दिन पहले दोनों कार होंडा सिवक और वोक्सवैगन जेट्टा को टक्कर देने के लिए टोयोटा ने कोराला को फिर से नए रूप रंग में ऑल्टिस के नाम से लॉन्च की।
एंट्री लेवल के डी-सेगमेंट की कारों में पूरे विश्व में टोयोटा करोला, होंडा सिविक और जेट्टा बिकती हैं इसकी कई वजह हैं। ऐसा नहीं हैं की ये कार सबसे बेहतर हैं बल्कि टोयोटा करोला सबसे पहले यानी 1966 में पहली बार लॉन्च हुई थी और होंडा सिविक 1972 में और वोक्सवैगन जेट्टा 1979 लॉन्च हुई थी।
ऑल्टिस पुरानी कोरोला से रूप रंग के मामले में बिलकुल अलग हैं तो ऑल्टिस में 1.8 लीटर का इंजन लगा हुआ हैं जिससे 132bph का पॉवर मिलता है। साथ ही इसका गेयर बाक्स पूरी तरह से न्यू टेक्नोलॉजी का है जिससे ये बेहतर परफॉर्मेंस देती है।
ऑल्टिस में एक खास चीज़ जो देखने को मिलती हैं वो हैं इसमें लगा क्रूज कंट्रोल सिस्टम लेकिन ये सुविधा इसके टॉप मॉडल में ही है। लेकिन लुक स्टाइल और कंफर्ट के मामले में होंडा सिविक सबसे आगे निकल जाती है। इसमें 1.8 लीटर का इंजन लगा हुआ है जो 132 बीएचपी का पॉवर देता है।
होंडा सिविक की यूएसपी है इसमें लगा पैडल सिफ्ट गेयर जो इस सेगमेंट की किसी भी कार में नहीं है। साथ ही ये कुछ सेकंड में ही 100 किमी से ज्यादा की रफ्तार पकड़ लेती है।
जेट्टा कार इंजन कैपेसिटी के मामले में होंडा सिविक और ऑल्टिस से कम है क्योंकि इसमें 1.6 लीटर का इंजन लगा हुआ है। इसका फ्रंट और रियर का लुक सिंपल और सोबर है जो अपनी ही कार गोल्फ से मेल खाती है। इसमें 16 इंच का तो टोरोंटो एलॉय व्हील लगा हुआ है और इस कार की खासियत है पेट्रोल इंजन के साथ डीजल विरिएंट भी होना। इसलिए ये कार डी सेगमेंट चाहने वालो मैं काफी लोकप्रिय हो रही है।








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