काठमांडू। नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर में तैनात भारतीय पुजारियों की शुक्रवार को माओवादियों ने पिटाई की और उनके कपड़े व जनेऊ फाड़कर उनकी परेड निकाली।
शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे चालीस से 50 माओवादी भक्तों की आड़ में मंदिर में पहुंचे और दो पुजारियों को बाहर खींच लिया। इन पुजारियों के नाम गिरीश भट्ट और राघवेंद्र भट्ट हैं। जब तक पुलिस इन पुजारियों की मदद के लिए पहुंचती दोनों की जबर्दस्त पिटाई की जा चुकी थी।
जिन पुजारियों पर आज हमला किया गया है वो कुछ दिनों पहले ही कर्नाटक से लाए गए थे। इस घटना के बाद हरकत में आए भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत नेपाल सरकार से इस बारे में जवाब-तलब किया है।
गौरतलब है कि गुरुवार को 'इंद्र जात्रा' उत्सव के दौरान सरकार के पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारी की नियुक्ति के फैसले से राजधानी काठमांडू में हिंसा भड़क उठी थी। पशुपतिनाथ की ओर जाने वाली सड़कों को गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने बंद कर दिया था।
प्रदर्शनकारी 'भारतीय पुजारी, भारत जाओ' का नारा लगा रहे थे। बुधवार शाम प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने पशुपतिनाथ मंदिर में दो भारतीय पुजारियों की नियुक्ति का फैसला सुनाया था, जिसके बाद से ही यहां प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
इससे पहले नेपाल की पूर्ववर्ती माओवादी सरकार ने 300 वर्ष पुरानी उस परंपरा को तोड़ दिया था, जिसके तहत पशुपतिनाथ मंदिर में केवल भारतीय पुजारियों को ही पूजा करवाने का अधिकार प्राप्त था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने नेपाल के इतिहास में पहली बार पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारी के स्थान पर नेपाली पुजारियों को नियुक्त किया था।
प्रचंड के फैसले का उस समय विरोध भी हुआ था लेकिन मई में प्रचंड के सत्ता से बाहर होने के बाद नई गठबंधन सरकार ने एक बार फिर से पुरानी परंपरा को जारी रखने का आदेश दिया था।
नेपाल के पीएम के सलाहकार राजन भट्टराई ने आईबीएन7 से बातचीत में कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। पुजारियों और मंदिर की सुरक्षा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सरकार की तरफ से आश्वस्त किया जाता है कि आगे से ऐसी घटना नहीं होने दी जाएगी।
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