लखीमपुर। कुदरत के कहर से इंसान ही नहीं जानवर भी दो-चार हो रहे हैं। यूपी के दुधवा नेशनल पार्क में भयंकर बाढ़ आ गई है जिससे वहां चल रहा प्रोजेक्ट टाइगर खतरे में पड़ गया है। जंगल में रहने वाले तमाम जानवर अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकल रहे हैं। मानसून और नेपाली नदियों के कहर ने पार्क का मंजर बदल डाला है। जंगल के कोर एरिया (वो जगह जहां बाघ रहता है) तक पानी ही पानी भर गया है।
प्रोजेक्ट टाइगर के लिए पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने टाइगर फोर्स का गठन किया था लेकिन बाढ़ बाघ के लिए खतरा बन गई है। कुदरत के कहर से दूसरे जानवर भी नहीं बच सके। दर्जनों घायल हिरन, खरगोश, तेंदुए के बच्चे अस्तित्व की लडा़ई लड़ रहे हैं।
दुधवा नेशनल पार्क में पहले भी बाढ़ आई थी लेकिन इस बार जो कहर जानवर झेल रहे हैं वैसा उन्होंने कभी नहीं झेला। ऊपर से सरकारी बेरुखी ने प्रोजेक्ट टाइगर पर पानी फेरने का पूरा इंतजाम कर दिया। सरकार इस बारे में कितनी सजग है ये सिंचाई मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बयान से ही पता चल जाता है। उन्होंने कहा कि दौरे मुआयने किए जा रहे हैं पर ये नहीं पता कि बाढ़ से जानवरों की मौत हो रही है। ये तो पता है कि वहां पानी भर गया है। अब आपने बताया है तो मैं देखता हूं कि इनको कैसे बचाया जा सकता है।
दरअसल इस महाविनाश का रिश्ता सरहद पार से जुड़ा है। इन सब की वजह शारदा नदी बनी। शारदा नदी ने खुद को पूरे नब्बे डिग्री पर मोड़ लिया। सैकड़ों सालों से नेपाल इस नदी में ढाई से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ता था। लेकिन पिछले 12-17 महीनों से 12 से 13 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। चीनी और कोरियन कंपनी की मदद से नेपाल शासन ने दलदली जमीन को खेतिहर जमीनों में बदलना शुरू कर दिया है। इसके लिए सरहद पार नदियों का रास्ता बदल दिया गया है।
पिछली बरसात के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने खतरा भांपते हुए मौके का मुआयना किया था लेकिन इस तबाही से जानवरों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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