चेन्नई। तमिलनाडु के अरियालुर में खुदाई में साढ़े छह करोड़ साल पुराने डायनासोर के अंडे मिले हैं। चेन्नई और तिरुचि हाईवे पर अरियालुर जिले में एक नदी के नीचे ये अंडे मिले। ये इलाका कावेरी नदी बेसिन का वो अहम इलाका है जहां जीवाश्म फैले हैं। जियोलॉजिस्ट इस इलाके में अक्सर नजर आते हैं।
12 सितंबर 2009 को रिसर्च के सिलसिले में रामकुमार और उनके रिसर्च स्कॉलरों को अरियालुर के सेंदुरई इलाके में एक छोटी सी नदी में रामकुमार की नजर अंडे जैसे पत्थरों पर पड़ी। रामकुमार को पहचानते देर नहीं लगी कि ये अंडे डायनासोर के हैं। इस इलाके का नाम पहली बार डायनासोर की वजह से नहीं हुआ है। 950 किलोमीटर का अरियालुर और पेरंबलूर जिले का ये इलाका 1843 से चर्चा में है।
इससे पहले 1860 में भी अरियालुर में ब्रिटिश जियोलॉजिस्ट को यहां डायनासोर की हड्डियां मिली थीं। जबकि इसके 150 साल बाद 1990 में सीमेंट फैक्ट्री में अंडे मिले। लेकिन 10 साल बाद पता चला कि ये डायनासोर के अंडे हैं। लेकिन पहली बार इतनी बड़ी तादाद में यहां डायनासोर के अंडे और घोंसलों के ये सबूत मिले हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक ये भारत में मिला डायनासोर का सबसे बड़ा नेस्टिंग ग्राउंड है। यानि यहां डायनासोर घोंसले जैसे घर बनाते थे जिनमें वो अंडे दिया करते थे।
शोधकर्ताओं के मुताबिक इन अंडों में दोनों तरह के डायनासोर के अंडे हैं। आक्रामक कारनोसोर डायनासोर (दांतों वाले खतरनाक) और पत्ते खाने वाले सोरोपोड डायनासोर ( लंबी गर्दन वाले)। हर अंडा करीब 13 से 20 सेंटीमीटर गोलाई का है और इनके घोंसले करीब सवा मीटर के मिले हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक ज्वालामुखी या बाढ़ आने की वजह से ये अंडे यूं ही दबे रह गए। इससे पहले मध्य प्रदेश में जबलपुर के करीब नर्मदा बेसिन को डायनासोर के अंडों के लिए जाना जाता था लेकिन इस खोज ने लगता है हकीकत बदल दी है। अब इन अंडों पर रिसर्च होगा। रिसर्च के लिए इन्हें जर्मनी भेजा जा रहा है यानि जल्द ही ये साफ हो जाएगा कि अरियालुर भारत का जुरासिक पार्क है।
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