नई दिल्ली। करवाचौथ का व्रत सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। करवाचौथ कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी में मनाया जाता है। ये व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब 4 बजे शुरू हो कर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद पूरा होता है।
यूं तो करवाचौथ सुहागिन स्त्रियों के लिए खास दिन माना जाता है लेकिन कई जगह करवाचौथ का व्रत कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाली शालू करवाचौथ की तैयारियों में काफी व्यस्त हैं। अभी तक शालू कि शादी नहीं हुई है। फिर भी वो ये व्रत रखती है।
इस बारे में शालू का कहना है कि मुझे करवाचौथ का व्रत रखना बहुत पसंद है। मेरी सहेलियां भी व्रत रखती हैं इसलिए मैं भी व्रत रखती हूं ताकि मुझे ऐसा वर मिले जो मेरे साथ कदम से कदम मिलाकर चले।
शालू ही नहीं कई लड़कियां हैं जो शादी से पहले करवाचौथ का व्रत रखती हैं ताकि उन्हें अच्छा पति मिले। हालांकि ये हरियाणा में ज्यादा देखने को मिलता है। धीरे-धीरे ये चलन बड़े शहरों में भी देखने को मिल रहा है। आखिर कौन नहीं चाहेगा कि उसे बेहद प्यार करने वाला जीवनसाथी मिले।
शास्त्रों के मुताबिक इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत कोई दूसरा नहीं है। व्रत का ये विधान बेहद प्राचीन है। कहा जाता है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भी करवाचौथ का उपवास किया था। इस व्रत के देवता चंद्रमा माने गए हैं। इसके पीछे भी एक कहानी है। कहा जाता है कि जब अर्जुन तप करने नीलगिरी पर्वत पर चले गए थे तो द्रौपदी परेशान हो गई। तब कृष्ण ने द्रौपदी को करवाचौथ का व्रत रखने और चांद कि पूजा करने कि सलाह दी थी।
पंडित लोकनाथ भारद्वाज ने बताया कि ये पर्व हेमंत ऋतु में होता है और कृष्ण ने गीता में इस ऋतु को सर्वश्रेष्ठ ऋतु बताया है। कहा गया है कि इस ऋतु में किसी भी प्रकार का संकल्प पूरा हो जाता है।
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