मुंबई। महाराष्ट्र में चुनाव के बाद अब कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान मची है। अशोक चह्वाण के सिर ताज सजने को लेकर शंका पैदा हो गई है। विलासराव देशमुख और नारायण राणे ने भी मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जोरदार लॉबिंग शुरू कर दी है। फिलहाल, विधायकों ने आखिरी फैसला सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है।
महाराष्ट्र में लगातार तीसरी बार कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनना तय है। लेकिन मुख्यमंत्री का मुद्दा अभी भी अटका पड़ा है। विधायक दल का नेता चुनने के लिए शनिवार को विधायक दल की बैठक हुई। इसमें ए के एंटनी, के रहमान खान और दिग्विजय सिंह बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक मौजूद थे। इस बैठक में सोनिया गांधी को मुख्यमंत्री चुनने के सारे अधिकार सौंप दिए गए। लेकिन अशोक चह्वाण की राह में कांटा बोने के लिए कांग्रेस के कई गुट सक्रिय हो गए हैं।
विधायक दल की बैठक खत्म होने के तुरंत बाद केन्द्रीय निरीक्षक विधायकों से अकेले से मिले और यहीं से शुरू हुई कवायद शक्ति प्रदर्शन की। नारायण राणे और विलासराव देशमुख अन्दर ही अन्दर ज्यादा से ज्यादा विधायकों का समर्थन जुटाने में जुटे हुए थे। एक-एक करके विधायक निरीक्षकों से मिलते रहे लेकिन मुख्यमंत्री पद के बारे में कोई भी खुलकर मीडिया के सामने अपनी राय देने के लिए तैयार नहीं था।
मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने इस बीच दावा किया है कि उनके पास चौदह निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है लेकिन सबकी नजर आलाकमान पर है। सबसे बड़ी परेशानी नारायण राणे को लेकर है। पिछली बार अशोक चह्वाण को गद्दी मिलते वक्त उन्होंने काफी नाटक किया था। आलाकमान तक पर निशाना साधा था। इस बार वे चुप रह जाएंगे इस पर किसी को यकीन नहीं। लेकिन करेंगे क्या, ये भी कोई नहीं जानता।
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