बीजिंग। ओलंपिक में आज एक और इतिहास रचा जा सकता है। इसके लिए सबकी नजरें भारतीय मुक्केबाज अखिल कुमार पर टिकी हैं। अगर आज अखिल जीत जाते हैं तो मुक्केबाजी में एक पदक लगभग तय हो जाएगा।
ओलंपिक के इतिहास में हिन्दुस्तानियों ने इससे पहले पदक की इतनी उम्मीदें कभी नहीं बांधी थी। ऐसा नहीं कि मुक्केबाजी में सिर्फ अखिल कुमार से उम्मीदें हैं। बल्कि हरियाणा के तीन लालों ने भारतीय उम्मीदों को परवान चढ़ा दिया है।
बॉक्सिंग रिंग पर हरियाणा के कुमारों का ऐसा जादू चला कि सभी देखते ही रह गए।
शुक्रवार को अखिल कुमार के जबर्दस्त प्रदर्शन का असर जीतेंद्र और वीजेंद्र कुमार पर भी दिखा। तीनों ही अब बस एक जीत दूर है ओलम्पिक मे़डल से।
कहते है इनकी पंच की धार छुरी से भी ज्यादा तेज है। जीतेंद्र रिंग में भले ही डेंजर ब्यॉय दिखे। लेकिन रिंग के बाहर ये बेहद ही भावुक इंसान है। हार इन्हें बिलकुल बर्दाश्त नहीं।
वही अखिल इरादों के बिलकुल पक्के है। इस बार तो उनके इरादे साफ है, गोल्ड और कुछ नहीं।
उम्मीद है कि सोमवार को मॉलडोवा के वेसलाव गोजन के खिलाफ क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में उन्हें आसानी से जीत मिलेगी।
54 किग्रा बेन्यम वेट केटगरी में अखिल का मुकाबला मॉलडोवा के वेसलाव गोजन वीएसे स्लाव से होगा। जबकि 20 अगस्त को वीजेंद्र कुमार 75 किग्रा मिडिलवेट केटगरी में भिड़ेंगे एक्वाडोर के कार्लोस से। उसी दिन जीतेंद्र का मुकाबला रूस को जॉर्जी बलाक्शिन से होगा।
इन युवा बॉक्सरों में काफी कुछ एक जैसा है। शायद तभी कमाल भी एक ही साथ करते है। तीनों ने 2006 कॉमनवेल्थ खेलों में मेडल अपनी झोली में डाला था।उसमें भी अखिल ही सबसे आगे थे। अखिल ने गोल्ड जबकी विजेंद्र ने सिल्वर और जीतेंद्र ने ब्रॉन्ज जीता था। उम्मीद है कि इस बार भी इनका कुछ ऐसा ही जलवा देखने को मिले।
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