नई दिल्ली। सरकारी नुमाइंदे चाहे जितनी भी सफाई से लोगों को धोखा दें लेकिन कभी ना कभी पोल सबके सामने खुल ही जाती है ऐसा ही कुछ हुआ दिल्ली में भी, जब दिल्ली की एक ऐतिहासिक धरोहर ने सरकार के अलग-अलग विभागों की पोल खोली।
सड़क के बीच में बने एक गेट से सारा ट्रैफिक होकर गुजरता है। पहले इस गेट की उंचाई काफी ज्यादा थी लेकिन जैसे-जैसे सड़क का लेवल बढ़ता गया गेट की उंचाई कम होती गई। इस वजह से यहां बड़े वाहनों को गुजरने में काफी दिक्कत होने लगी। यही नहीं आए दिन यहां दुर्घटनाएं भी होती रहती है। ट्रैफिक की इस समस्या को देखते हुए यहां के लोगों ने एएसआई से शिकायत की।
2006 में शिकायतों पर गौर करते हुए एमसीडी और एएसआई के अधिकारियों ने इस जगह की जांच की और फैसला किया की रोड का स्तर 1 से डेढ़ मीटर कम कर दिया जाए। ऐसा करने पर त्रिपोलिया गेट की नींव को कोई खतरा नहीं होगा। इसके लिए एएसआई ने एमसीडी को पहले एक प्लान तैयार करने को कहा।
वहीं मॉडल टाउन एक निचला रिहायशी क्षेत्र है। जिस वजह से इस इमारत को तो नुकसान होगा ही साथ ही इस नाले के बनने से यहां के लोगों के लिए भी मुसीबत बन जाएगा। ये नाला 20 से 25 फीट तक खोदा जा चुका है जिससे यहां के घरों की नींव तक खराब हो चुकी है। यही नहीं यहां 70 मीटर की दूरी पर मेनहोल बनाए गए हैं जिससे सीवर भर जाने पर नाले का सारा पानी यहां के रिहायशी इलाकों में भर जाएगा।
इस पूरे मामले पर दायर आरटीआई के जवाब में एमसीडी ने कहा कि वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया के नाले को बंद करके इस ड्रेन को खोला जाएगा जिससे गंदा पानी सीधे यमुना में नहीं जाएगा। इस काम के लिए 19 करोड़ 32 लाख रुपये पास कराए गए। आरटीआई में रामा Constructions का नाम बताया गया था जबकि एमसीडी की वेबसाइट पर सत्यप्रकाश Constructions का नाम दिया गया है। बताया गया कि ड्रेन के लिए ASI से इजाजत ली गई है।
ये ड्रेन न सिर्फ इस इलाके के लिए एक मुसीबत है बल्कि सीधे तौर पर पैसों की बर्बादी भी है। इस बीच आरटीआई के तहत एएसआई ने बताया कि एमसीडी ने इस ड्रेन के लिए उनसे कोई एनओसी नहीं लिया है।
जब एएसआई से पूछा गया कि इस मामले में उन्होंने एमसीडी के खिलाफ क्या कार्यवाई की है। लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया। इस मुद्दे को लेकर मैंने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी अपने ही कानून को तोड़ कर मेन पाइप लाइन से पानी को सीधा सप्लाई कर पानी की चोरी कर रहे हैं। कई लोगों के घर तो पानी की कोई कमी नहीं और कई लोग पानी को तरस रहें हैं। आज मैं दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के पास पूछने जा रहा हूं कि आखिर इन अवैध कनेक्शन के बारे में वो क्या कार्यवाई कर रहे हैं।
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