IBN7/कोबरा पोस्ट
नई दिल्ली। पंडित अनिल कुमार जोशी काले धन को सफेद बनाने के हुनरमंद हैं। हैदराबाद के निखिल चेतना ट्रस्ट के कर्ताधर्ता हैं। एक दूसरे बाबा के मैनेजर संदीप ने दलाली के लालच में हमें उनसे मिलवाया। ये मुलाकात दिल्ली के चांदीवाला गेस्टहाउस में हुई। पंडित जी बिंदास निकले। पहली ही मुलाकात में धंधे की बात पर आ गए। सीधे बोले कि अगर हमें पांच-सात करोड़ की ब्लैक मनी व्हाइट बनानी है तो मेरा ट्रस्ट काम करेगा। अगर रकम पचास या सौ करोड़ की है तो एक बड़े नेता का कोऑपरेटिव बैंक काम आएगा।
संवाददाता - महाराजजी ऐसा था कि सपोज कीजिए हमारे पास पांच करोड़ रुपये हैं जो ब्लैक का पैसा है। हम आपके ट्रस्ट में देते हैं। आपने जैसा बताया कि (एक मंत्री का नाम) का जो कोऑपरेटिव बैंक है, हमारा पैसा उस बैंक में चला जाएगा।
अनिल कुमार जोशी - हूं
अनिल कुमार जोशी - अगर पांच करोड़ तक की डील करनी है तो हमारे ट्रस्ट तक रहेंगे। लार्ज एमाउंट करना है तो फिर बैंक को इन्वॉल्व करेंगे।
संवाददाता - लार्ज एमाउंट भी रहेगा हमारे पास।
सुना आपने यहां बात एक बैंक की हो रही है, जरा सोचिए कौन सा बैंक हो सकता है जहां करोड़ों रुपए की काली कमाई आराम से - बिना किसी मुश्किल या सवाल-जवाब के जमा की जा सके। और फिर पंडित जी का कमीशन काट कर उसी बैंक का डिमांड ड्राफ्ट आपको वापस मिल जाए - आखिर बेईमानों का ये कौन सा बैंक है। पंडित अनिल कुमार जोशी के दावे अगर सच हैं तो इस बैंक से केंद्र सरकार के एक बेहद अहम महकमे के आला मंत्री का रिश्ता है। पंडित ने ये भी बताया कि ये मंत्री खुद बैंक के इन सौदों में डील नहीं करता बल्कि उसका पीए और घरवाले ये काम करते हैं।
अनिल कुमार जोशी - वो (एक मंत्री का नाम) डायरेक्ट बात नहीं करते। उनके पीए, उनका बेटा इसमें इन्वॉल्व हैं। मंत्री या मुख्यमंत्री को लाने में उनके मामू का बड़ा हाथ है। वो ही ये सारी डिलिंग करते हैं।
साफ था, सच उगलवाने के लिए हमें उंगली टेढ़ी करनी पड़ेगी। हमने पंडित अनिल कुमार जोशी से कहा वो चाहें तो टैक्स बचाने में हमारी कॉरपोरेट कंपनी की मदद करें या फिर उनका ब्लैक पैसा व्हाइट बनवा दें, बदले में कमीशन पाएं।
संवाददाता - तो ऐसा करें संदीप जी, महाराज जी से सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट की बात कर लेते हैं।
अनिल कुमार जोशी - मैं यही तो कह रहा था Second option is the best option.
राजनीति से करीबी रिश्तों की दुहाई देने वाले पंडित अनिल कुमार जोशी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया। काले पैसे की उनकी भूख सामने आ गई। मगर ये क्या पंडित जी ने एक और झटका दिया। एक और केंद्रीय मंत्री पर अपनी मेहरबानी का बखान किया। बताया कि वो इस मंत्री के जरिये दस हजार करोड़ रुपया ब्लैक से व्हाइट कर चुके हैं।
संवाददाता - महाराजजी एक बार दोबारा मैं इस बात को रिपीट कर रहा हूं। थोड़ी सी जानकारी चाह रहा हूं कि ब्लैक का व्हाइट आपने किया है इसके पहले।
अनिल कुमार जोशी - कई बार ब्लैक का व्हाइट ही तो बता रहा हूं।
संवाददाता - कर चुके हैं मतलब।
दूसरे बाबा का मैनेजर - यस, फलां मंत्री के थ्रू हुआ है नाम भी बताया है उन्होंने, मद्रास से हुआ है।
संवाददाता - कितना एमाउंट हुआ है?
अनिल कुमार जोशी - वो तो बहुत एमाउंट था। दस हजार करोड़ का हुआ है।
हम चकरा गए - पंडित जी तो बोले ही जा रहे थे। क्या सच मानें, क्या झूठ। साफ लग रहा था कि दोनों केंद्रीय मंत्री उनके शिष्य हैं, फिर भी हम उनके नाम नहीं ले सकते थे। हम सोच में पड़ गए। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमपर रौब झाड़ने के लिए पंडित अनिल कुमार जोशी बड़े-बड़े नाम गुन रहे हैं। या फिर शायद सच वही है जो वो कह रहे हैं। जो भी हो मंत्रियों के खिलाफ हमारे पास कोई सबूत नहीं है सो हमने उनके नाम जाहिर नहीं किए। लेकिन सवाल अपनी जगह जस के तस हैं। क्या धर्म और राजनीति का ये घोल ऐसा दलदल है जिसमें ऊपर से नीचे तक सबके सब आकंठ डूबे हुए हैं।
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