बीजिंग। ओलंपिक में भारत के लिए आज फिर आशाओं का दिन है। अखिल तो कोई पदक नहीं जीत पाए।
लेकिन अब उम्मीद है विजेंद्र और जितेंद्र से। ओलंपिक में भारत की आस को नई दिशा देने वाली मुक्केबाजी तिकड़ी के दो होनहार सदस्य विजेंद्र कुमार और जितेंद्रकुमार बुधवार को बीजिंग ओलंपिक में अपना-अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेलेंगे।
23 वर्षीय विजेंद्र 75 किलोग्राम मिडिलवेट वर्ग में जहां इक्वाडोर के कार्लोस गोंगोरा से भिड़ेंगे, वहीं 51 किलोग्राम फ्लाईवेट वर्ग में जितेंद्र का सामना तीन बार के यूरोपीय चैंपियन रूस के ग्रेगरी बलाकशीन से होना है।
हालांकि हरियाणा के एक लाल की चुनौती तो खत्म हो गई। लेकिन दो लाल विजेंद्र और जीतेंद्र से उम्मीदें अभी बाकी हैं। पूरे हरियाणा समेत देश भर की निगाहें इन दोनों पर टिकी हैं।
हरियाणा के विजेंद्र जब अपने घूंसों की बरसात करनी शुरू करते हैं तो फिर रुकने का नाम नहीं लेते। विजेंद्र ने 75 किलोग्राम वर्ग में थाइलैंड के अंगखान चोंम्फूफुआंग पर दमदार घूंसो की बरसात कर क्वाटर फाइनल में जगह बनाई थी। वहीं जितेंद्र कुमार ने भी भारत की उम्मीदों को बरकरार रखा। जितेंद्र उज्बेकिस्तान के तुलाशबॉय को अपने जोरदार मुक्कों से ढेर कर यहां तक पहुंचे है।
जितेंद्र और वीजेंद्र मेडल से सिर्फ एक कदम दूर है। हालांकि इनके कोच को दोनों की जीत का पूरा भरोसा है। भारतीय कोच ने आने वाले मुकाबलों के लिए कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता। अखिल की हार के बाद अगले मुकाबलों के बारे में कुछ कहना जायज नहीं होगा। कुल मिलाकर हम पदक की आस लगाए हुए हैं।
भारत के इन दोनों का रास्ता थोड़ा मुश्किल जरूर है पर नामुमकिन नहीं। इनके परिवार समेत पूरे देश की उम्मीदें इन दोनों धुरंधरों पर टिकी हैं।
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