नई दिल्ली। ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि गप्पें लड़ाना समय की बर्बादी है और इससे बचना चाहिए। अधिकतर समाजों में तो गपशप या गॉसिप शब्द को नकारात्मक तौर पर देखा जाता है लेकिन इसका सकारात्मक पक्ष भी है। विद्वानों का मानना है कि गप्प से व्यक्ति तनावमुक्त रहता है और उसमें रोगों से लडने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
वैज्ञानिकों के ताजा शोधों के निष्कर्षों से पता चलता है कि गप्पें लड़ाना मानव की सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक सेहत के लिए कहीं ज्यादा बेहतर है। वर्तमान दौर में संचार क्रांति का उपकरण मोबाइल फोन गप्पें मारने का नया साधन बन कर उभरा है। मोबाइल फोन पर होने वाली गप्पों से इंसान को औद्योगीकरण के एक बड़े खतरे अलगाववाद से लड़ने के लिए नया हथियार मिल गया है।
मोबाइल फोन से मनुष्य को गप्पें लड़ाने के नए अवसर मिले हैं बल्कि इनकी प्रकृति में कहीं ज्यादा बदलाव भी आए हैं। अब व्यक्ति समय के बंधन, स्थान की सीमाओं, तीसरे की दखलअंदाजी, गोपनीयता के दबाव से मुक्त होकर गप्प कर सकता है। इतना ही नहीं मोबाइल फोन ने बोलने के स्थान पर एसएमएस के जरिए गप्पें मारने का एक अवसर उपलब्ध कराया है।
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