कोलकाता। कुछ हफ्तों पहले कोलकाता से सीजे प्रतीक ने बाल मज़दूरी करने बाले बच्चों के बारे में अपनी एक रिपोर्ट दी थी। IBN7 पर दिखाई गई इस रिपोर्ट ने कोलकाता प्रशासन को कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया।
तो क्या थी ये मुहिम...
प्रतीक रानका पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रहते हैं। उसके आस-पास के इलाके में बच्चों की स्थिति काफी बुरी है। बच्चों का शोषण होता है और कम पैसे देकर उनसे जबरन कारखानों में, दुकानो में और घरों में काम कराया जाता है। चिल्ड्रन डे के मौके पर प्रतीक ने इन बच्चों से उनकी जिंदगी का हाल पूछा।
सिटीज़न जर्नलिस्ट पर ये रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री हरकत में आए। श्रममंत्री ने बालश्रमिकों की बढ़ती संख्या की बात मानते हुए इन बच्चों के लिए स्कूल खोलने और उनके रहने के लिए बालगृह बनवाने की घोषणा की है।
श्रम मंत्री, पश्चिम बंगाल अनादि साहू ने कहा कि आज पश्चिम बंगाल में बाल श्रमिकों की संख्या 8 लाख है जबकि यह आंकड़ा पूरे भारत में 3 करोड़ से ज्यादा है। आज हमारे देश में बालश्रम के तहत जो कानून है वे नाकाफी है। इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्या ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से बात भी की है। साहू ने कहा कि बहुत जल्द राज्य के सभी 19 जिलों में बाल श्रमिकों के लिए आवासीय स्कूल खोलेंगे जहां उनको मुफ्त शिक्षा, खाना, कपड़े और रहने की व्यवसय की जाएगी।
पेट की आग बुझाने के लिए अपना बचपन खोने को मजबूर इन बच्चों की जिंदगी भी संवर सकती है अगर सरकार जिम्मेदार हो जाए और आम जनता जागरूक हो। श्रम मंत्री की इन घोषाणाओं पर कब तक अमल होता है ये तो आने वाला समय ही बताएगा।
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