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मिड डे मील के नाम पर स्कूली बच्चों पर अत्याचार

Posted on Dec 02, 2009 at 14:26 | Updated Dec 02, 2009 at 14:40

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गाजियाबाद। सरकार स्कूल में बच्चों के लिए अच्छे महौल और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। सरकारी स्कूलों में बच्चों के साथ क्या सुलूक होता है ये पड़ताल की गाजियाबाद में रहने वाले सचिन सोनी ने और इसका एक वीडियो बना कर IBN7 को भेजा।

सचिन सोनी ने बताया कि किस तरह सरकारी स्कूलों में बच्चों के साथ अत्याचार किया जा रहा है। बझैड़ा कलां के प्राईमरी स्कूल का जब सोनी ने मुआयना किया तो पाया की यहां बच्चे मिड डे मील बांटने का काम कर रहे हैं। बच्चों से खाना बंटवाना खतरनाक तो है ही इस तरह उन से काम कराना उन पर अत्याचार करना भी है। शिक्षा विभाग के मुताबिक खाना बांटने का काम शिक्षकों का है। मैंने इस सिलसिले में यहां के प्रधानाध्यापक से बात की तो उन्होंने स्कूल में कम स्टाफ होने की मजबूरी हमारे सामने रखी।

वहीं स्कूल टीचर सुनील कुमार ने कहा कि अकेला टीचर होने के नाते मुझे बच्चों से खाना बंटवाने में सहयोग लेना होता है।




ये कहानी सिर्फ बझैड़ा कलां के स्कूल की नहीं बल्कि गाजियाबाद के ज्यादातर स्कूल ऐसे है जहां बच्चे खुद भोजन बांटते और फिर बर्तन साफ करते हैं।

खंदौड़ा के एक स्कूल में पढ़ने वाली आयशा ने बताया कि खाना हम बांटते हैं। जब उनसे पूछा गया कि बर्तन कौन धोता है तो उसने बताया कि जो खाना बांटता है वही बर्तन धोता है।

इस तरह सोनी कई स्कूलों में गए और पाया कि सभी जगह यही हाल है। झलावा गांव के स्कूल में भी यहा हाल दिखा। यहां पढ़ाई ठप्प पड़ी थी और बच्चे सिर्फ मिड डे मील के लिए आए थे। सोनी के मुताबिक मिड डे मील पहुंचाने पर सारा काम बच्चों ने ही किया और शिक्षक दूर खड़े उन्हें देखते रहे।

मिड डे मील ही नहीं स्कूल में साफ सफाई का काम भी बच्चे करते है क्योंकि सरकारी स्कूलों में सफाई कर्मियों की व्यवस्था नहीं है।

दरअसल स्कूलों में पहले से ही छात्रों के अनुपात में शिक्षक कम हैं, जहां हैं वहां भी शिक्षक मिड डे मील बंटवाने और स्कूल की सफाई का काम बच्चों से ही करवाते हैं क्योंकि इन कामों के लिए सरकार ने कर्मचारी ही नियुक्त नहीं किए हैं। सोनी के मुताबिक पिछले कई साल से वो बच्चों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस बारे में लिखा लेकिन विभाग की तरफ से आजतक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग मासूम बच्चों के साथ हो रही इस बदसूलकी रोकने के बजाए सोनी को गुमराह करने में लगा है।

सोनी ने बताया कि एक आरटीआई के जवाब में शिक्षा विभाग के अधिकारियों झूठमूठ लिख कर दे दिया कि अब किसी स्कूल में मिड डे मील योजना के तहत बच्चों से काम नहीं कराया जाता है। और अगर किसी भी स्कूल में बच्चे मिड डे मील का काम करते पाए गए तो वहां के प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। लेकिन हकीकत ये है कि अभी भी स्कूल में बच्चों से ही काम करवाए जा रहे हैं और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सोनी ने इस बारे में मुख्य विकास अधिकारी से बात की उन्होंने कहा की ये अत्याचार की जानकारी उनके सामने आती है तो वो कार्रवाई करेंगें। सोनी ने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट उनको भेजेंगे और देखेंगे कि वो कितनी जल्द कार्रवाई करते हैं।


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