नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में साइबर नाइफ तकनीक क्रांति बनकर आई है। इस तकनीक से हजारों मरीज़ों को जीवनदान मिला है। रेडियशन ,कीमोथेरेपी जैसे पारंपरिक तकनीक से हटकर साइबर नाइफ के ज़रिए ऐसे ट्यूमर भी ऑपरेट किए जा सकते हैं जो बेहद संवेदनशील जगह पर हों या जिनकी सर्जरी करना नामुमकिन माना जाता है।
क्या आपका कोई अपना कैंसर की खतरनाक बीमारी से जूझ रहा है? रेडियशन का दर्द अब उनसे सहा नहीं जा रहा? क्या आपरेशन के बाद भी ट्यूमर बढ़ रहा है, और दोबारा सर्जरी संभव नहीं मानी जा रही? ऐसे कैंसर पीड़ितों के लिए साइबर तकनीक उम्मीद की किरण बन कर आई है। ये साइबर नाइफ या चाकू एक रोबोट बांह से जुड़ा होता है जिसे डाक्टर नियंत्रित करता है। इससे पेचीदा से पेचीदा सर्जरी की जा सकती है।
साइबर नाइफ के जरिये सर्जरी होने पर न तो खून निकलता है और न कैंसर प्रभावित अंग के अलावा शरीर पर कहीं असर पड़ता है। यानी रोगी जल्दी ही सामान्य जीवन जी सकता है। इस इलाज के लिए महज़ तीन से पांच बैठकों की ज़रूरत होती है। अमेरिका मे इस इलाज को 2001 में मान्यता मिली। आज ये तकनीक दुनिया के लगभग 150 केंद्रों में उपलब्ध है, जिनमें ज्यादातर अमेरिका में ही हैं। एशिया में इस वक्त ये सुविधा सिर्फ भारत में है। एचसीजी बैंगलोर इंस्टिट्यूट ऑफ ऑंकोलोजी और चेन्नई का अपोलो अस्पताल इस तकनीक से लैस है।
डॉक्टरों की नजर में इस तकनीक के और फायदे भी हैं।
-ये दर्द रहित है
-ऑपरेशन के लायक न माने जाने वाले ट्यूमर का इलाज हो सकता है
-अत्यंत सटीक है
-कम से कम साइड इफेक्ट्स यानि अन्य प्रभाव
-इलाज का समय 5 से 6 हफ्ते से घटकर 3 से 5 दिन
इसमें एडेप्टिव इमेज रेडिएशन थिरेपी सिस्टम भी मौजूद है, जो विशिष्ट उपचार के लिए सुविधाजनक और स्वीकार्य थिरेपी है।
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