नई दिल्ली। खूबसूरत आंखें कौन नहीं चाहता लेकिन आंखों की खूबसूरती तब तक ही है जब तक कि वो देख सकती हैं। जब तक वो दुनिया को देखने के लिए किसी पर निर्भर नहीं हैं। इसलिए आपनी आंखों की अहमियत जानिए और रखिए इनका खास ख्याल।
आंखें हमारे शरीर का वो अंग हैं जो हमें इस दुनिया की खूबसूरती से जोड़ती हैं। रंगों की अहमियत हमें आंखों से ही पता चलती है। अगर आंखों का ख्याल ध्यान से न रखा जाए तो आंखों का कोई रोग आपके जीवन को अंधेरे से भी भर सकता है और सोचिए जब रंग देखने को मिले तो किसी रोग के कारण छाया अंधेरा किसे अच्छा लगेगा।
मालूम हो कि ग्लूकोमा भी ऐसा ही आंखों का एक रोग है। ये एक ऐसी बीमारी है जो धीरे धीरे आंखों की रोशनी को बिल्कुल खत्म कर देती है। इसमें व्यक्ति को चीज का सिर्फ केंद्र दिखाई देता है और बाद में ये भी दिखना बंद हो जाता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कितनी खतरनाक बीमारी हो सकती है। तो इससे बचने के लिए इसके लक्षण भी पता होना जरूरी है।
ग्लूकोमा के लक्षण
-रंगों में फर्क करने में मुश्किल होती है
-चीजों का कुछ हिस्सा ही दिखाई देता है
-आंखों की पुतलियों में या उनके आसपास दर्द रहने लगता है
-लगातार सिरदर्द रहने लगता है
-तेज रोशनी के आसपास आकृतियां दिखने लगती हैं
अक्सर ग्लूकोमा के लक्षण का पता नहीं चलता। दुनिया भर में ये बीमारी करीब 6 करोड़ लोगों को हर साल प्रभावित करती है और इसका बड़ा हिस्सा भारत में मौजूद है। इस बीमारी के ज्यादातर मामले 40 साल से ज्यादा के लोगों में देखने को मिलते हैं। नवजात शिशुओं में भी ये बीमारी आसानी से देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर इसके लक्षण और कारणों के बारे में कुछ जानकारी हो तो आप सही समय पर इसे होने से पहले ही रोक सकते हैं।
ग्लूकोमा के कारण
-परिवार में पहले से ही किसी को ये बीमारी हो
-बहुत ज्यादा तनावग्रस्त रहना
-ज्यादा स्टेरॉइड्स लेना
-ब्लड प्रेशर स्थिर न रहना
-ज्यादा शुगर लेवल या डायबिटीक होना
ग्लूकोमा के इलाज के लिए सबसे पहले जरूरी है इस बीमारी की जांच करवाना ताकि सही समय पर सही इलाज से इसे रोका जा सके। ग्लूकोमा के डायग्नोसिस के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं जिनमें आंखों पर पड़ने वाले दबाव, आंखों की आकृति में बदलाव, ऑप्टिक नर्व का चेकअप, कॉर्निया की मोटाई जैसी कई चीजें चेक की जाती हैं।
ग्लूकोमा का इलाज
कई मामलों में तो आंखों की दवाई से ही काम बन जाता है लेकिन ग्लूकोमा का इलाज कई तरह की सर्जरियों से भी किया जा सकता है। ये बीमारी बदलते मौसम की वजह से या खाने में लापरवाही की वजह से हुई बीमारी नहीं है। इसलिए जरूरी है कि इसके इलाज में कोई लापरवाही न बरती जाए और बहुत ही सावधानी से इसका इलाज किया जाए। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेकर ही कुछ भी करें। अपने आप आंखों में कोई भी दवाई न डालें और न ही कोई दवाई खाएं क्योंकि हो सकता है जिस दवाई को आप अपनी आंखों के लिए अमृत समझ कर लें वो ही जहर हो।
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