मुंबई। 2009 ने बहुत सारे सितारों को आसमान पर चढ़ाया। वहीं बहुत सारे सितारों को जमीन पर भी लुढ़काया। साल 2009 कई बड़े बजट की कई फिल्मों के लिए बहुत बुरा रहा। आखिर कौन सी हैं वो 3 फिल्में जो बनी 2009 की सुपरफ्लाप 3 फिल्म।
नंबर-1
चांदनी चौक टू चाइना
चांदनी चौक टू चाइना से पहले जो अक्षय एक के बाद एक धड़ाधड हिट फिल्में दिए जा रहे थे। जिनका किसी भी फिल्म में होना ही कामयाबी की गारंटी माने जाने लगा था। उन अक्षय की मेगा बजट बेहद महत्वकांक्षी फिल्म चांदनी चौक टू चाइना फ्लॉप हो गई।
दरअसल सबकुछ होने के बावजूद फिल्म में अगर कुछ नहीं था तो वो थी कहानी। फिल्म में कहानी सिरे से गायब थी। लोगों को ये यकीन ही नहीं हो सका कि चांदनी चौक में रहने वाला एक बावर्ची कैसे देखते ही देखते चीन पहुंच जाता है। वहां लोग उसे भगवान समझने लगते हैं। फिर वो लोगों पर जुल्म कर रहे विलेन से भिड़ जाता है। शुरुआत में नाकाम हाथ लगती है लेकिन जल्द ही वो उसे हरा देता है।
लोगों को इस बात पर भी यकीन नहीं हुआ कि कैसे चीन से लोग अपने भगवान की तलाश में हिंदुस्तान चले आते हैं और अक्षय को अपने साथ ले जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक 51 करोड़ में बनी फिल्म सिर्फ 75 करोड़ की कमाई कर सकी।
साल की शुरुआत में आई चांदनी चौक टू चाइना से न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री बल्कि दर्शकों को भी बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन चांदनी चौक से चीन पहुंचने के चक्कर में सबकुछ तहस नहस हो गया और इस तरह बॉलीवुड को लगा साल की पहली सुपर फ्लॉप फिल्म का बड़ा झटका।
नंबर-2
ब्लू
कोई फिल्म फ्लॉप क्यों होती है। अगर इस सवाल का जवाब चाहिए तो ब्लू देखनी चाहिए।
ब्लू में वो सारे कारण मौजूद हैं जो किसी भी फिल्म को फ्लॉप बनाते हैं।
ब्लू फिल्म के शुरू के 1 घंटे तक तो ये पता ही नहीं चलता कि हो क्या रहा है।.ये पता ही नहीं चलता कि अक्षय कुमार गहरे ब्लू समंदर में क्या कर रहे हैं। साथ ही संजय दत्त और शायद लारा दत्ता को भी नहीं पता होगा कि वो क्या कर रही हैं ।
एक घंटे बाद दर्शकों को ये पता चलता है कि ब्लू में दरअसल अक्षय और संजय दत्त को समंदर में छिपा एक खजाना ढूंढना है। उस खजाने का पता सिर्फ संजय दत्त को है लेकिन वो वहां तक जाने के लिए तैयार ही नहीं।
अब संजय दत्त को खजाने तक ले जाने के लिए जो कवायद शुरू होती है। वो किसी भी गले नहीं उतरती। संजय का ही खास दोस्त अक्षय उसके खिलाफ साजिश रचता है। संजय दत्त खजाने तक जाने के लिए मजबूर होता है लेकिन तभी इस बात का भी खुलासा हो जाता है कि ये सब अक्षय का ही प्लॉन है। इतना ही नहीं,फिल्म के आखिर में अक्षय समंदर में कूदकर सुसाइड भी कर लेता है।
लेकिन मरने के बाद अचानक आखिर में अक्षय की री एंट्री होती है।
फिल्म में कटरीना कैफ और लारा दत्ता भी हैं लेकिन समझ में ही नहीं आता कि डॉयरेक्टर साहब उनसे चाहते क्या थे। कटरीना के तो फिल्म में गिने चुने शॉट हैं और लारा के जिम्मे सिर्फ नुमाईश का काम आया।
कहा जाता है कि ब्लू को बनाने में 100 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हुए। हालांकि इसका कोई ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं है लेकिन ये बात किसी से छुपी नहीं है इस फिल्म में प्रोड्यूसर को इतना घाटा हुआ कि अगली बार वो ऐसे किसी विषय पर फिल्म बनाने से पहले दस नहीं, सौ बार सोचेगा।
ब्लू में फ्लॉप होने की इतनी वजह मौजूद हैं कि आप एक ढूंढेगे और हजार मिल जाएगी।
नंबर-3
अलादीन
ये बात कितनी सच है ये तो पता नहीं लेकिन बचपन से सुनते हैं आए हैं कि अलादीन के चिराग से निकलने वाला जिन्न सारी मुरादें पूरी कर देता है। जब अलादीन के निर्माता ने ये फिल्म बनाने की सोची होगी तो यकीनन उनके दिमाग में भी यही बात होगी। लेकिन प्रोड्यूसर की ये विश पूरी नहीं हुई।
सिनेमा हाल से बाहर निकलते ही हर दर्शक बोला कि जिसने ये फिल्म बनाई है उसे अकेले बैठकर उसे अलादीन देखने की सजा दी जाए।
बिग बी की बेमिसाल एक्टिंग, ग्लैमर के तौर पर श्रीलंकाई तड़के के बावजूद आखिर अलादीन ने टिकट खिड़की पर पानी तक क्यों नहीं मांगा। जबकि अलादीन के रिलीज होने से पहले खुद बिग बी कामयाबी के बड़े बड़े दावे कर रहे थे।
दरअसल कहानी में कुछ भी ऐसा नहीं था जिसे देखने के बाद दर्शकों के मुंह से वाह निकलता। फिल्म में किसी को हो या न हो लेकिन रितेश देशमुख के माता पिता को यकीन है कि अलादीन के चिराग के अस्तित्व है। इसलिए वो अपने बेटे यानी रितेश का नाम भी अलादीन रख देते हैं। अलादीन के मां बाप का कत्ल एक जिन्न के हाथों होता है। एक दिन रितेश को सचमुच का चिराग और जिन्न यानी बिग बी मिल जाते हैं। दोनों मिलकर दुश्मन जिन्न का खात्म करते हैं।
ये फिल्म कितने में बनी इसका तो सही सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाया लेकिन अमिताभ बच्चन जिन्न बनने के बावजूद अपने अलादीन को टिकट खिड़की पर नहीं बचा सके।
जिन्न बने अमिताभ ने फिल्म में तो अपने अलादीन यानी रितेश देशमुख को बचा लिया। काश असल जिंदगी में वो अपने प्रोड्यूसर की मुरादें भी पूरी कर देते। वैसे इस फिल्म में सबकुछ था लेकिन कहानी नहीं थी।
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