जयपुर। रामकुमारी बेहद गरीब हैं। मजदूरी करके तीन बच्चों की रोटी का जुगाड़ मुश्किल से कर पाती हैं। सरकार ने सितंबर 2008 में पंजाब नेशनल बैंक में खाता खुलवाकर 1500 रुपए रामकुमारी के खाते में जमा करवाए। साथ में दिया गया स्मार्ट कार्ड। इस स्मार्ट कार्ड से ही वे पैसे निकाल सकती हैं लेकिन कार्ड के जरिए पैसे निकालना उनके लिए जी का जंजाल बन गया है। न तो वो इस स्मार्ट कार्ड से खाते में जमा पैसे निकाल पाती हैं और न ही कोई दूसरा फायदा मिलता है।
भामाशाह महिला सशक्तिकरण योजना के तहत मुफ्त दवाइयां और नरेगा के पैसे सीधे गरीब महिलाओं के खाते में जमा करने की योजना थी। बैंक ने रामकुमारी जैसी 8873 महिलाओं के ऐसे बायोमैट्रिक कार्ड बनाए, लेकिन वो न बैंक की शाखाओं में काम कर रहे हैं और न ही सरकार के भामाशाह सेंटर पर। इस योजना की शुरुआत राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विधानसभा चुनाव से पहले अगस्त 2008 में की थी। योजना में सूबे की बेहद गरीब 50 लाख महिलाओं का चयन किया गया। योजना के तहत सब कुछ हुआ लेकिन गरीब महिलाओं को पैसे नहीं मिले।
25 जिलों में रामकुमारी जैसी ही 25 लाख महिलाओं के पंजाब नेशनल बैंक ने खाते खोले। 1500 रुपए के हिसाब से राजस्थान सरकार 161 करोड़ रुपए पंजाब नेशनल बैंक को दे चुकी है लेकिन बैंक ने दस लाख खातों में तो 1500-1500 रुपए जमा करवाए लेकिन 15 लाख खातों में पैसे जमा ही नहीं हुए। बैंक की दलील है कि महिलाओं के पास या तो स्मार्ट कार्ड नहीं है या फिर कार्ड के इस्तेमाल करने के लिए मशीनें नहीं हैं।
खैर गरीबों को पैसा भले ही नहीं मिला लेकिन अब तक बैंक 20 करोड़ से ज्यादा ब्याज कमा चुका है। इसके बावजूद बैंक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। प्रबंध निदेशक एस पी सिंह कहते हैं कि कार्ड जारी करने का काम आईएलएफएस का था, लेकिन इस कंपनी ने बायोमैट्रिक कार्ड के लिए मशीनें नहीं लगाईं। दूसरी एजेंसियों ने काम नहीं किया और कार्ड जारी नहीं किए तो हम क्या करें।
बीजेपी का आरोप है कि योजना का फायदा उसे न मिले इसकी वजह से गहलोत सरकार इसे लागू करने से आनाकानी कर रही है। वसुंधराराजे कहती हैं कि ये मनमानी है। अगर ये स्कीम अच्छी नहीं होती तो यूआईडी नहीं बनता। बैंक और नामी कंपनी नहीं जुड़ती। ये हठधर्मिता है बस इसलिए नहीं कर रहे हैं कि इसे पूरा कर देंगे तो लगेगा कि उनकी ये अच्छी स्कीम है।
आईएलएफएस और बाट्रनिक्स कंपनी को कार्ड बनाने के बदले नब्बे करोड़ का भुगतान करना था लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने न तो ये भुगतान किया और न 161 करोड़ का हिसाब पंजाब नेशनल बैंक से मांगा। महिलाओं की नाराजगी से बचने के लिए इस योजना की समीक्षा करने के लिए गहलोत सरकार ने एक कमेटी बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
पूछने पर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रभान कहते हैं कि कहां आप 161 करोड़ की बात कर रहे हैं। नरेगा में दस हजार करोड़ आ रहे हैं। इसमें भी तो आधा पैसा महिलाओं की जेब में ही जा रहा है। जाहिर है बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति का खामियाजा राज्य की 50 लाख गरीब महिलाओं को उठाना पड़ रहा है।
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