हैदराबाद। अलग तेलंगाना की आग ने आंध्र प्रदेश के उद्योग धंधों की कमर तोड़कर रख दी है। राज्य की शान आईटी और फिल्म इंडस्ट्री से लेकर नरेगा तक के काम पर जबरदस्त असर पड़ रहा है। रोज़-रोज़ के बवाल ने आईटी इंडस्ट्री की उत्पादन क्षमता पर ज़बरदस्त असर डाला है। आलम ये है कि बड़ी-बड़ी आईटी कंपनिया आंध्र प्रदेश से बोरिया बिस्तर तक समेटने की सोचने लगी हैं। हालात पर काबू के लिए सरकार को बाकायदा एक टास्क फोर्स बनानी पड़ी है।
हैदराबाद से सटे साइबराबाद की इन शानदार इमारतों में दफ्तर हैं दुनिया की उन बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियों के जिन्होंने हैदराबाद को दुनिया के नक्शे पर जानामाना शहर बना दिया। लेकिन आजकल ये कंपनियां सहमी हुई हैं। वजह है तेलंगाना आंदोलन की आग। जब जब हैदराबाद और आसपास के इलाकों में बवाल मचता है तो इन इमारतों में सन्नाटा छा जाता है। कर्मचारी दफ्तरों नहीं पहुंच पाते और असर पड़ता है कंपनियों के काम पर।
इस आईटी युग की शुरुआत करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू तेलंगना मुद्दे पर तो ज्यादा बोलना नहीं चाहते लेकिन आईटी कंपनियों के बहाने मौजूदा सरकार को कोसने से नहीं चूके।
साइबराबाद में 1300 आईटी कंपनियां हैं। जो ढाई लाख लोगों को सीधा रोज़गार दे रही हैं जबकि 9 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोज़गार। पिछले साल आईटी इंडस्ट्री का कारोबार रहा 31 हज़ार करोड़ रुपये जो कि आंध्र प्रदेश के कुल बजट का लगभग एक तिहाई है। यानी सरकार इस पूंजी को गंवाने के हालात में नहीं है। लिहाज़ा आनन फानन में एक टास्क फोर्स बनानी पड़ी है।
टॉस्क फोर्स बनाने के बाद हालात में कुछ सुधार ज़रूर हुआ है। लेकिन जिन आईटी कंपनियों के लिए तमाम राज्य सरकारें पलकें बिछाए रहती हैं उन्हें इन हालातों में संतुष्ट करना आंध्रा सरकार के लिए आसान नहीं। तेलंगाना आंदोलन ने तेलगू फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध को भी धीमा कर दिया है। तेलंगाना समर्थकों के हाथों कई फिल्मों का प्रदर्शन रोके जाने और शूटिंग्स पर हमलों के बाद फिल्म इंडस्ट्री में दहशत का आलम है।
अलग राज्य की मांग को लेकर धधक रही तेलंगाना की आग में केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना नरेगा भी सुलग रही है। नतीजा ये कि नरेगा से रोटी कमाने वाले दिहाड़ी मज़दूर काम की बजाए रैलियों और धरने प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। जिसका असर नरेगा के सैंकड़ों प्रोजेक्टंस पर पड़ रहा है।
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